स्वधा स्तोत्रम्

ब्रह्मोवाच – Brahmovach स्वधोच्चारणमात्रेण तीर्थस्नायी भवेन्नर:। मुच्यते सर्वपापेभ्यो वाजपेयफलं लभेत्।।1।। अर्थ – ब्रह्मा जी बोले – ‘स्वधा’ शब्द के उच्चारण से मानव तीर्थ स्नायी हो जाता है. वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर वाजपेय यज्ञ के फल का अधिकारी हो जाता है.   स्वधा स्वधा स्वधेत्येवं यदि वारत्रयं स्मरेत्। श्राद्धस्य फलमाप्नोति कालस्य तर्पणस्य च।।2।। अर्थ…

श्रीसरस्वती स्तोत्रम्

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा।।1।।   आशासु राशीभवदंगवल्ली – भासैव दासीकृतदुग्धसिन्धुम् । मन्दस्मितैर्निन्दितशारदेन्दुं वन्देSरविन्दासनसुन्दरि त्वाम्।।2।।   शारदा शारदाम्भोजवदना    वदनाम्बुजे। सर्वदा       सर्वदास्माकं       सन्निधिं       क्रियात्।।3।।   सरस्वतीं     च   तां   नौमि   वागधिष्ठातृदेवताम्। देवत्वं        प्रतिपद्यन्ते      यदनुग्रहतो      जना:।।4।।   पातु    नो    निकषग्रावा    मतिहेम्न:   सरस्वती । प्राज्ञेतरपरिच्छेदं वचसैव…

नीलसरस्वती स्तोत्रम्

घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयंकरि। भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।1।। ऊँ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते। जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।2।। जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि। द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।3।। सौम्यक्रोधधरे रूपे चण्डरूपे नमोSस्तु ते। सृष्टिरूपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम्।।4।। जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला। मूढ़तां हर मे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।5।। वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नम:। उग्रतारे…

सूर्य द्वादशनाम स्तोत्र

आदित्यं प्रथमं नाम द्वितीयं तु दिवाकर:। तृतीयं भास्कर: प्रोक्तं चतुर्थं तु प्रभाकर:।।1।।   पंचमं तु सहस्त्रांशु षष्ठं त्रैलोक्यलोचन:। सप्तमं हरिदश्वश्य अष्टमं च विभावसु:।।2।।   नवमं दिनकर: प्रोक्तों दशमं द्वादशात्मक:। एकादशं त्रयोमूर्ति द्वादशं सूर्य एव च।।3।।   यदि किसी जातक(Native) की जन्म कुण्डली में सूर्य की महादशा चली हुई है अथवा सूर्य की अन्तर्दशा चली हुई…

शिवप्रात:स्मरणस्तोत्रम्

प्रात: स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं गंगाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम्। खट्वांगशूलवरदाभयहसतमीशं   संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्।।1।।   प्रातर्नमामि गिरिशं गिरिजार्द्धदेहं सर्गस्थितिप्रलयकारनमादिदेवम्। विश्वेश्वरं विजितविश्वमनोSभिरामं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्।।2।।   प्रातर्भजामि शिवमेकमनन्तमाद्यं वेदान्तवेद्यमनघं पुरुषं महान्तम्। नामादिभेदरहितं   च   विकारशून्यं   संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्।।3।।   प्रात: समुत्थाय शिवं विचिन्त्य श्लोकत्रयं येSनुदिनं पठन्ति ते दु:खजातं बहुजनमसण्जितं हित्वा पदं यान्ति पदेव शम्भो:।।4।। भगवान शिव के इस स्तोत्र का जो भी व्यक्ति सुबह जाप करता है,…

गंगा दशहरा स्तोत्रम्

ऊँ  नम:  शिवायै  गंगायै  शिवदायै  नमो नम:। नमस्ते विष्णुरूपिण्यै ब्रह्ममूर्त्यै नमोSस्तु ते।।1।। नमस्ते   रुद्ररूपिण्यै   शांकर्यै   ते  नमो  नम:। सर्वदेवस्वरूपिण्यै      नमो        भेषजमूर्तये।।2।। सर्वस्य सर्वव्याधीनां भिषक्छ्रेष्ठ्यै नमोSस्तु ते। स्थास्नुजंगमसम्भूतविषहन्त्र्यै     नमोSस्तु ते।।3।। संसारविषनाशिन्यै     जीवनायै    नमोSस्तु ते। तापत्रितयसंहन्त्र्यै   प्राणेश्यै   ते   नमोSस्तु ते।।4।। शान्तिसन्तानकारिण्यै    नमस्ते   शुद्धमूर्तये। सर्वसंशुद्धिकारिण्यै       नम:    पापारिमूर्तये।।5।। भुक्तिमुक्तिप्रदायिन्यै   भद्रदायै  नमो  नम:। भोगोपभोगदायिन्यै  भोगवत्यै   नमोSस्तु ते।।6।। मन्दाकिन्यै नमस्तेSस्तु स्वर्गदायै…

श्रीविन्ध्येश्वरी स्तोत्रम्

जो भी व्यक्ति श्रद्धा तथा विश्वास के साथ नियमित रुप से 9 दिन तक इस स्तोत्र का जाप करता है उसे जीवन में अपार सफलता प्राप्त होती है. धन-धान्य, सुख-समृद्धि, वैभव, पराक्रम तथा सौभाग्य में वृद्धि होती है. निशुम्भशुम्भमर्दिनीं प्रचण्डमुण्डखण्डिनीम्। वने  रणे  प्रकाशिनीं   भजामि   विन्ध्यवासिनीम्।।1। अर्थ – शुम्भ तथा निशुम्भ का संहार करने वाली, चण्ड…

भद्रकालीस्तोत्रम्

(Kali Stotram For Success) ब्रह्मविष्णु ऊचतु: – Brahmavishnu Uchatuh नमामि       त्वां    विश्वकर्त्रीं    परेशीं नित्यामाद्यां सत्यविज्ञानरूपाम्। वाचातीतां निर्गुणां चातिसूक्ष्मां ज्ञानातीतां शुद्धविज्ञानगम्याम्।।1।। अर्थ – ब्रह्मा और विष्णु बोले – सर्वसृष्टिकारिणी, परमेश्वरी, सत्यविज्ञानरूपा, नित्या, आद्याशक्ति! आपको हम प्रणाम करते हैं. आप वाणी से परे हैं, निर्गुण और अति सूक्ष्म हैं, ज्ञान से परे और शुद्ध विज्ञान से प्राप्य…

देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्

न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथा:। न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्।।1।।   विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया विधेयाशक्यत्वात्तव  चरणयोर्या च्युतिरभूत्। तदेतत्क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति।।2।।   पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहव: सन्ति सरला: परं  तेषां  मध्ये…

विष्णु शतनाम स्तोत्रम्

नारद उवाच ऊँ वासुदेवं हृषीकेशं वामनं जलशायिनम्। जनार्दनं  हरिं  कृष्णं श्रीवक्षं गरुडध्वजम्।।   वाराहं  पुण्डरीकाक्षं  नृसिंहं नरकान्तकम्। अव्यक्तं शाश्वतं विष्णुमनन्तमजमव्ययम्।।   नारायणं गदाध्यक्षं गोविन्दं कीर्तिभाजनम्। गोवर्द्धनोद्धरं     देवं     भूधरं    भुवनेश्वरम्।।   वेत्तारं    यज्ञपुरुषं    यज्ञेशं   यज्ञवाहकम्। चक्रपाणिं गदापाणिं शंख्हपाणिं नरोत्तमम्।।   वैकुण्ठं   दुष्टदमनं   भूगर्भं   पीतवाससम्। त्रिविक्रमं त्रिकालज्ञं त्रिमूर्ति नन्दिकेश्वरम्।।   रामं  रामं  हयग्रीवं  भीमं  रौद्रं  भवोद्भवम्। श्रीपतिं…

गोविन्द दामोदर स्तोत्रम्

अग्रे कुरूणामथ दु:शासनेनाहृतवस्त्रकेशा । कृष्णा   तदाक्रोशदनन्यनाथा    गोविन्द    दामोदर   माधवेति ।।1।।   श्रीकृष्ण  विष्णो  मधुकैटभारे  भक्तानुकम्पिन्  भगवन्  मुरारे । त्रायस्व   मां   केशव   लोकनाथ   गोविन्द   दामोदर  माधवेति ।।2।।   विक्रेतुकामाखिलगोपकन्या मुरारिपादार्पितचित्तवृत्ति:। दध्यादिकं    मोहवशादवोचद्    गोविन्द   दामोदर   माधवेति ।।3।।   उलूखले   सम्भृततण्डुलांश्च   संघट्टयन्त्यो  मुसलै:  प्रमुग्धा: । गायन्ति  गोप्यो  जनितानुरागा  गोविन्द  दामोदर माधवेति ।।4।।   काचित्कराम्भोजपुटे  निषण्णं  क्रीडाशुकं  किंशुकरक्ततुण्डम् ।…

षट्पदी स्तोत्रं

अविनयमपनय विष्णो दमय मन: शमय विषयमृगतृष्णाम्। भूतदयां     विस्तारय      तारय             संसारसागरत:।।1।। अर्थ – हे विष्णु भगवान! मेरी उद्दण्डता दूर कीजिए, मेरे मन का दमन कीजिए और विषयों की मृगतृष्णा को शान्त कर दीजिए, प्राणियों के प्रति मेरा दयाभाव बढ़ाइए और इस संसार-समुद्र से मुझे पार लागाइए.   दिव्यधुनीमकरन्दे              परिमलपरिभोगसच्चिदानन्दे। श्रीपतिपदारविन्दे      भवभयखेदच्छिदे               वन्दे।।2।। अर्थ – भगवान लक्ष्मीपति…