गंगा अष्टोत्तर-शतनामस्तोत्र

ओंकारस्वरुपिणी गंगा  ऊँ त्रिपथगा देवी नम: ऊँ शंभुमौलिविहारिणी नम:  ऊँ जाह्नवी नम:  ऊँ पापहन्त्री नम: ऊँ महापातकनाशिनी नम: ऊँ पतितोद्धारिणी

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श्रीललितात्रिशतीस्तोत्ररत्नप्रारम्भ:

सकुंकुमविलेपनामलिकचुम्बिकस्तूरिकां  समन्दहसितेक्षणां सशरचापपाशांकुशाम् । अशेषजनमोहिनीमरुणमाल्यभूषाम्बरां  जपाकुसुमभासुरां जपविधौ स्मरेदम्बिकाम् ।।   अगस्त्य उवाच  हयग्रीव दयासिन्धो भगवन् भक्तवत्सल । त्वत्त: श्रुतमशेषेण श्रोतव्यं

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अथ कीलकम्

ऊँ अस्य श्रीकीलकमन्त्रस्य शिव ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, श्रीमहासरस्वती देवता, श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थं सप्तशतीपाठांगत्वेन जपे विनियोग: ।   ऊँ नमश्चण्डिकायै ।।   मार्कण्डेय

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