महाभागवत – देवी पुराण – पाँचवाँ अध्याय 

इस अध्याय में दक्षप्रजापति की शिव के प्रति द्वेषबुद्धि, महर्षि दधीचि द्वारा दक्ष को समझाना तथा भगवान शिव के माहात्म्य

पढ़ना जारी रखें

महाभागवत – देवीपुराण – तीसरा अध्याय 

तीसरे अध्याय में देवी माहात्म्य का वर्णन है, देवी द्वारा त्रिदेवों को सृष्ट्यादि के कार्यों में नियुक्त करना, आदिशक्ति का

पढ़ना जारी रखें

महाभागवत – देवीपुराण – दूसरा अध्याय 

इस अध्याय में महामुनि जैमिनि द्वारा श्रीवेदव्यास जी से शिव-नारद-संवाद के रूप में वर्णित देवी के माहात्म्य वाले महाभागवत को

पढ़ना जारी रखें

महाभागवत – देवीपुराण – पहला अध्याय 

श्रीगणेश जी को नमस्कार है।। श्रीगणेश जी के चरण कमल के परागकण, जो देवेन्द्र के मस्तक पर विराजमान मन्दार-पुष्प के

पढ़ना जारी रखें

अथ प्राधानिकं रहस्यम्

ऊँ अस्य श्रीसप्तशतीरहस्यत्रस्य नारायण ऋषिरनुष्टुप्छन्द:, महाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवता यथोक्तफलावाप्तयर्थं जपे विनियोग: । अर्थ – ऊँ सप्तशती के इन तीनों रहस्यों के

पढ़ना जारी रखें