पुरुषोत्तम सहस्त्रनाम स्तोत्रम्

इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें वेदरूपी कल्पवृक्ष के परिपक्व फल “निगमकल्पतरोर्गलितं फलं” अर्थात श्रीमद्भागवतमहापुराण के प्रथम स्कन्ध

पढ़ना जारी रखें

श्रीदत्तात्रेय वज्र कवच

श्रीगणेशाय नम: । श्रीदत्तात्रेय नम: ।। ऋषिय ऊचु: कथं संकल्पसिद्धि: स्याद्वेदव्यास कलौ युगे । धर्मार्थकाममोक्षाणां साधनं किमुदाहृतम् ।।1।। अर्थ ऋषियों

पढ़ना जारी रखें

दत्तात्रेय स्तोत्र | Dattatreya Stotram

जटाधरं पाण्डुरंगं शूलहस्तं कृपानिधिम् । सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ।। अर्थ पीले वर्ण की आकृति वाले, जटा धारण किए हुए,

पढ़ना जारी रखें

पार्वती-मंगल

पार्वती-मंगल में श्रीतुलसीदास जी ने देवाधिदेव भगवान् शंकर के द्वारा जगदम्बा पार्वती के कल्याणमय पाणिग्रहण का काव्यरूप में रसमय चित्रण

पढ़ना जारी रखें

श्रावण मास माहात्म्य – उनत्तीसवाँ (29th) अध्याय

श्रावण मास में किये जाने वाले व्रतों का कालनिर्णय ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! अब मैं पूर्व में कहे

पढ़ना जारी रखें

श्रावण मास माहात्म्य – अट्ठाईसवाँ अध्याय

अगस्त्य जी को अर्घ्य प्रदान की विधि ईश्वर बोले – हे ब्रह्मपुत्र ! अब मैं अगस्त्य जी को अर्घ्य प्रदान

पढ़ना जारी रखें

श्रावण मास माहात्म्य – सत्ताईसवाँ अध्याय

कर्क संक्रांति और सिंह संक्रांति में किए जाने वाले कार्य ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! श्रावण मास में कर्क

पढ़ना जारी रखें