जन्म कुंडली के अनुसार समस्याएँ और उनका मंंत्रोपचार 

जन्म कुंडली में मौजूद दोषों के कारण व्यक्ति को जीवन में अनेकों बार असफलताओं का सामना करना पड़ता है. इन

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महाभागवत – देवीपुराण – तैंतीसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में कार्तिकेय जी द्वारा तारकासुर का वध, देवसेना में हर्षोल्लास का वर्णन किया गया है.  श्रीमहादेवजी बोले –

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महाभागवत – देवी पुराण – बत्तीसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में देवासुर-संग्राम में देवसेनापति कार्तिकेय तथा तारकासुर के भीषण युद्ध का वर्णन है.  श्रीमहादेवजी बोले – तुरही के

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महाभागवत – देवी पुराण – इकतीसवाँ अध्याय

इस अध्याय में कुमार कार्तिकेय का तारकासुर के विनाश के लिए ससैन्य उद्यत होना है, ब्रह्माजी द्वारा उन्हें वाहन के

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महाभागवत – देवी पुराण – तीसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में देवताओं द्वारा देवी पार्वती की स्तुति, भगवान शंकर के तेज से षण्मुख कार्तिकेय का प्रादुर्भाव, देवताओं के

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महाभागवत – देवी पुराण – उनतीसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में शिव-पार्वती का एकान्त-विहार है, पृथ्वी देवी का गोरूप धारण कर देवताओं के साथ ब्रह्माजी के पास जाना,

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महाभागवत – देवीपुराण – अठ्ठाईसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में हिमालय द्वारा बारात का यथोचित सत्कार करना है, शिव-पार्वती के मांगलिक विवाहोत्सव का वर्णन है, शिव-पार्वती के

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महाभागवत – देवीपुराण – सत्ताईसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में ब्रह्मा, विष्णु तथा रति द्वारा प्रार्थना करने पर भगवान शंकर का कामदेव को पुन: जीवित करना है,

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