गरुड़ पुराण – पहला अध्याय

(भगवान विष्णु तथा गरुड़ के संवाद में गरुड़ पुराण – पापी मनुष्यों की इस लोक तथा परलोक में होने वाली दुर्गति का वर्णन, दश गात्र के पिण्डदान से यातना देह का निर्माण।) धर्म ही जिसका सुदृढ़ मूल है, वेद जिसका स्कन्ध(तना) है, पुराण रूपी शाखाओं से जो समृद्ध है, यज्ञ जिसका पुष्प है और मोक्ष…

प्रदोषस्तोत्रम्

जय देव जगन्नाथ जय शंकर शाश्वत । जय सर्वसुराध्यक्ष जय सर्वसुरार्चित ।।1।। जय सर्वगुणातीत जय सर्ववरप्रद । जय नित्यनिराधार जय विश्वम्भराव्यय।।2।। जय विश्वैकवन्द्येश जय नागेन्द्रभूषण । जय गौरीपते शम्भो जय चन्द्रार्धशेखर ।।3।। जय कोट्यर्कसंकाश जयानन्तगुणाश्रय । जय भद्र विरूपाक्ष जयाचिन्त्य निरंजन ।।4।। जय नाथ कृपासिन्धो जय भक्तार्तिभंजन । जय दुस्तरसंसारसागरोत्तारण प्रभो ।।5।। प्रसीद मे महादेव…

भद्रा तिथियाँ दिसंबर 2018

तिथि /Dates समय/Time 1 दिसंबर 26:41 से अगले दिन दोपहर 14:01 तक 5 दिसंबर 12:03 से 24:08 तक 11 दिसंबर 07:06 से 20:22 तक 15 दिसंबर 04:16 से 17:15 तक 18 दिसंबर 19:47 से अगले दिन सुबह 07:36 तक 21 दिसंबर 26:09 से अगले दिन 12:44 तक 25 दिसंबर 03:24 से 13:48 तक 28 दिसंबर…

भद्रा तिथियाँ नवंबर 2018

तिथि /Dates समय/Time 2 नवंबर 18:11 से सुबह 05:11 तक 5 नवंबर 23:47 से अगले दिन सुबह 10:07 तक 11 नवंबर 10:59 से 23:45 तक 15 नवंबर 07:05 से 20:23 तक 18 नवंबर 26:02 से अगले दिन 14:30 तक 22 नवंबर 12:54 से 24:02 तक 25 नवंबर 17:23 से सुबह 04:07 तक 28 नवंबर 20:52…

भद्रा तिथियाँ सितंबर 2018

तिथि /Dates समय/Time 1 सितंबर 21:45 से अगले दिन सुबह 09:17 तक 5 सितंबर 04:13 से 15:01 तक 8 सितंबर 05:59 से 16:21 तक 13 सितंबर 03:30 से 14:52 तक 16 सितंबर 15:55 से 28:50 तक (सुबह 04:50 तक) 20 सितंबर 11:59 से 25:17 तक 24 सितंबर 07:18 से 19:51 तक 27 सितंबर 20:54 से…

विष्णु षटपदी

अविनयमपनयविष्णो दमयं मन: शमयविषयमृगतृष्णां । भूतदयां विस्तारय तारय संसारसागरात:।।1।। अर्थ – हे विष्णु भगवान ! मेरी उद्दण्डता दूर कीजिए. मेरे मन का दमन कीजिए और विषयों की मृगतृष्णा को शान्त कर दीजिए, प्राणियों के प्रति मेरा दयाभाव बढ़ायें और इस संसार-समुद्र से मुझे पार लगाइये.   दिव्यधुनीमकरन्दे परिमलपरिभोगसच्चिदानन्दे । श्रीपतिपदारविन्दे भवभयखेदच्छिदे वन्दे ।।2।। अर्थ –…

श्री विष्णु चालीसा

                               ।।दोहा।। जय जय जय श्री जगत पति, जगदाधार अनन्त। विश्वेश्वर अखिलेश अज, सर्वेश्वर भगवन्त।।                                   ।।चौपाई।। जय जय धरणी-धर श्रुति सागर। जयति गदाधर सदगुण…

खग्रास चन्द्रग्रहण – 31 जनवरी, 2018

31 जनवरी, सन 2018, दिन बुधवार, माघ पूर्णिमा के दिन सायंकाल से खग्रास चन्द्रग्रहण सारे भारतवर्ष में दिखाई देगा. इस ग्रहण की खग्रास आकृति सारे भारत में देखी जाएगी. यह ग्रहण मिजोरम, अरु-प्रदेश, आसाम, सिक्किम, मेघालय, पूर्वी पश्चिम बंगाल में चन्द्रोदय के बाद आरम्भ होगा. भारत के अन्य भागों में इस ग्रहण का आरंभ चन्द्रोदय…

श्रीमणिकर्णिकाष्टकम्

त्वत्तीरे मणिकर्णिके हरिहरौ सायुज्यमुक्तिप्रदौ वादं तौ कुरुत: परस्परमुभौ जन्तौ: प्रयाणोत्सवे। मद्रूपो मनुजोSयमस्तु हरिणा प्रोक्त: शवस्तत्क्षणात् तन्मध्याद् भृगुलाण्छनो गरुडग: पीताम्बरो निर्गत:।।1।। अर्थ – हे मणिकर्णिके! आप के तट पर भगवान विष्णु और शिव सायुज्य मुक्ति प्रदान करते हैं. (एक बार) जीव के महाप्रयाण के समय वे दोनों (उस जीव को अपने-अपने लोक ले जाने के लिए)…

तन्त्रोक्तं रात्रिसूक्तम्

{योगनिद्रास्तुति:} ऊँ विश्वेश्वरीं जगद्धात्रीं स्थितिसंहारकारिणीम्। निद्रां भगवतीं विष्णोरतुलां तेजस: प्रभु:।।1।। अर्थ – जो इस विश्व की अधीश्वरी, जगत को धारण करने वाली, संसार का पालन और संहार करने वाली तथा तेज:स्वरुप भगवान विष्णु की अनुपम शक्ति हैं, उन्हीं भगवती निद्रा देवी की भगवान ब्रह्मा स्तुति करने लगे.                …

माघ माहात्म्य – अठ्ठाईसवाँ अध्याय

वशिष्ठजी कहने लगे कि हे राजा दिलीप! बहुत से जन-समूह सहित अच्छोद सरोवर में स्नान करके सुखपूर्वक मोक्ष को प्राप्त हो गए तब लोमशजी कहने लगे संसार रूपी इस तीर्थ राजा को सब श्रद्धापूर्वक देखो. यहाँ पर तैंतीस करोड़ देवता आकर आनंदपूर्वक रहते हैं. यह अक्षय वट है जिनकी जड़े पाताल तक गई हैं और…

माघ माहात्म्य – सत्ताईसवाँ अध्याय

प्रेत कहने लगा कि हे पथिक! मैं इस समय तुम्हारे पास जो यह गंगा जल हैं, उसे माँगता हूँ क्योंकि मैंने इसका बहुत कुछ माहात्म्य सुना है. मैंने इस पर्वत पर गंगा जल का बड़ा अद्भुत आश्चर्य देखा था इसलिए यह जल मांगता हूँ, मैं प्रेत योनि में अति दुखी हूँ. एक ब्राह्मण अनधिकारी को…