श्रीरामचन्द्राष्टकम्

चिदाकारो धाता परमसुखद: पावनतनु- र्मुनीन्द्रैर्योगीन्द्रैर्यतिपतिसुरेन्द्रैर्हनुमता । सदा सेव्य: पूर्णो जनकतनयांग: सुरगुरू रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम्।।1।।   मुकुन्दो गोविन्दो जनकतनयालालितपद: पदं प्राप्ता यस्याधमकुलभवा चापि शबरी । गिरातीतोSगम्यो विमलधिषणैर्वेदवचसा रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम् ।।2।।   धराधीशोSधीश: सुरनरवराणां रघुपति: किरीटी केयूरी कनककपिश: शोभितवपु:। समासीन: पीठे रविशतनिभे शान्तमनसो रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते…

प्रात: स्मरणम् – परब्रह्मण:

प्रात: स्मरामि हृदि संस्फुरदात्मतत्त्वं सच्चित्सुखं परमहंसगतिं तुरीयम् । यत्स्वप्नजागरसुषुप्तिमवैति नित्यं तद्ब्रह्म निष्कलमहं न च भूतसंघ:।।1।। अर्थ – मैं प्रात:काल, हृदय में स्फुरित होते हुए आत्मतत्त्व का स्मरण करता/करती हूँ, जो सत, चित और आनन्दरूप है, परमहंसों का प्राप्य स्थान है और जाग्रदादि तीनों अवस्थाओं से विलक्षण है, जो स्वप्न, सुषुप्ति और जाग्रत अवस्था को नित्य…

श्रीराधाष्टकम्

नमस्ते श्रियै राधिकायै परायै नमस्ते नमस्ते मुकुन्दप्रियायै। सदानन्दरूपे प्रसीद त्वमन्त:- प्रकाशे स्फुरन्ती मुकुन्देन सार्धम् ।।1।। अर्थ – श्रीराधिके! तुम्हीं श्री लक्ष्मी हो, तुम्हें नमस्कार है, तुम्हीं पराशक्ति राधिका हो, तुम्हें नमस्कार है। तुम मुकुन्द की प्रियतमा हो, तुम्हें नमस्कार है। सदानन्दस्वरूपे देवि! तुम मेरे अन्त:करण के प्रकाश में श्यामसुन्दर श्रीकृष्ण के साथ सुशोभित होती हुई…

सुरभिस्तोत्रम्

महेन्द्र उवाच नमो देव्यै महादेव्यै सुरभ्यै च नमो नम:। गवां बीजस्वरूपायै नमस्ते जगदम्बिके।।1।। नमो राधाप्रियायै च पद्मांशायै नमो नम:। नम: कृष्णप्रियायै च गवां मात्रे नमो नम:।।2।। अर्थ – देवी एवं महादेवी सुरभि को बार-बार नमस्कार है। जगदम्बिके! तुम गौओं की बीजस्वरुपा हो, तुम्हें नमस्कार है। तुम श्रीराधा को प्रिय हो, तुम्हें नमस्कार है। तुम लक्ष्मी…

चंद्रमा

जन्म कुंडली में चंद्रमा सबसे ज्यादा सौम्य ग्रह माना जाता है और कुंडली के अनुसार मन का कारक ग्रह है। सभी ग्रहों को देवता रुप में पूजा जाता है इसलिए चंद्रमा को भी देवता माना गया है। चंद्र देव का वर्ण गोरा है और इनके वस्त्र, अश्व तथा रथ तीनों ही श्वेत वर्ण के हैं।…

वैशाख मास की अंतिम तीन तिथियों का महत्व

श्रुतदेव जी कहते हैं – राजेन्द्र ! वैशाख के शुक्ल पक्ष में जो अन्तिम तीन तिथियाँ, त्रयोादशी से पूर्णिमा तक, हैं वे बड़ी पवित्र और शुभ कारक हैं। उनका नाम “पुष्करिणी” हैं, वे सब पापों का क्षय करने वाली हैं। जो संपूर्ण वैशाख मास में स्नान करने में असमर्थ हैं, वह यदि इन तीन तिथियों…

वैशाख की अक्षय तृतीया और द्वादशी की महत्ता

श्रुतदेव जी कहते हैं – जो मनुष्य अक्षय तृतीया को सूर्योदय काल में प्रात: स्नान करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करके कथा सुनते हैं वे मोक्ष के भागी होते हैं। जो उस दिन श्रीमधुसूदन की प्रसन्नता के लिए दान करते हैं, उनका वह पुण्यकर्म भगवान की आज्ञा से अक्षय फल देता है। वैशाख…

वैशाख माहात्म्य – स्कन्द पुराण

वैशाख मास की श्रेष्ठता नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तम् । देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ।। अर्थ – भगवान नारायण, नरश्रेष्ठ नर, देवी सरस्वती तथा महर्षि वेदव्यास को नमस्कार करके भगवान की विजय-कथा से परिपूर्ण इतिहास-पुराण आदि का पाठ करना चाहिए।   सूतजी कहते हैं – राजा अम्बरीष ने परमेष्ठी ब्रह्मा के पुत्र देवर्षि नारद…

वैशाख-माहात्म्य प्रसंग में राजा महीरथ की कथा

यमराज कहते हैं – ब्रह्मन् ! पूर्वकाल की बात है, महीरथ नाम से विख्यात एक राजा थे। उन्हें अपने पूर्वजन्म के  पुण्यों के फलस्वरुप प्रचुर ऎश्वर्य और सम्पत्ति प्राप्त हुई थी परन्तु राजा राज्यलक्ष्मी का सारा भार मन्त्री पर रखकर स्वयं विषयभोग में आसक्त हो रहे थे। वे न प्रजा की ओर दृष्टि डालते थे…

तुलसीदल और अश्वत्थ(पीपल वृक्ष) की महिमा

ब्राह्मण ने पूछा – धर्मराज ! वैशाख मास में प्रात:काल स्नान करके एकाग्रचित्त हुआ पुरुष भगवान माधव का पूजन किस प्रकार करें? आप इसकी विधि का वर्णन करें। धर्मराज ने कहा – ब्रह्मन् ! पत्तों की जितनी जातियाँ हैं, उन सबमें तुलसी, भगवान श्रीविष्णु को अधिक प्रिय है। पुष्कर आदि जितने तीर्थ हैं, गंगा आदि…

वैशाख स्नान – यम/ब्राह्मण संवाद

नरक तथा स्वर्ग में जाने वाले कर्मों का वर्णन ऋषियों ने कहा – सूतजी ! इस विषय को पुन: विस्तार से कहिए। आपके उत्तम वचनामृतों का पान करते-करते हमें तृप्ति नहीं होती है। सूतजी बोले – महर्षियों ! इस विषय में एक प्राचीन इतिहास कहा करते हैं, जिसमें एक ब्राह्मण और महात्मा धर्मराज के संवाद…

वैशाख मास में स्नान, तर्पण, पूजन विधि और महिमा

अम्बरीष ने पूछा – मुने ! वैशाख माह के व्रत का क्या विधान है? इसमें किस तपस्या का अनुष्ठान करना पड़ता है? क्या दान होता है? कैसे स्नान किया जाता है और किस प्रकार भगवान केशव की पूजा की जाती है? ब्रह्मर्षे ! आप श्रीहरि के प्रिय भक्त तथा सर्वज्ञ हैं, अत: कृपा करके मुझे…