ग्रहों के यंत्र

किसी भी जातक की कुंडली में हर ग्रह की अपनी भूमिका होती है, कोई अच्छे तो कोई बुरे फल देने वाला होता है. अच्छे भावों के स्वामी यदि पीड़ित हैं तो उन्हें बली बनाने के लिए उन ग्रहों से संबंधित रत्न धारण करने की सलाह दे दी जाती है लेकिन जब बुरे भाव अथवा बुरे…

राशियों के लिए जपनीय मंत्र

भचक्र(Zodiac) में कुल 12 राशियाँ हैं और इन्हीं 12 राशियों में से कोई एक जन्म कुंडली का लग्न(Ascendant) बनती है तो कोई एक राशि जन्म राशि अथवा चन्द्र राशि(Moon Sign) बनती है. कई बार लग्न तथा जन्म राशि एक भी हो सकती है अर्थात लग्न में ही चंद्रमा स्थित होने से लग्न तथा चंद्र राशि…

शनि कवच

शनि ग्रह की पीड़ा से बचने के लिए अनेकानेक मंत्र जाप, पाठ आदि शास्त्रों में दिए गए हैं. शनि ग्रह के मंत्र भी कई प्रकार हैं और कवच का उल्लेख भी मिलता है. युद्ध क्षेत्र में जाने से पूर्व सिपाही अपने शरीर पर एक लोहे का कवच धारण करता था ताकि दुश्मनों के वार से…

शनैश्चर स्तवराज स्तोत्र

“भविष्य पुराण” में शनैश्चर स्तवराज स्तोत्र का उल्लेख किया गया है. जो भी व्यक्ति अथवा साधक इस स्तोत्र का नियमित रुप से पाठ करता है वह हर प्रकार की समस्या तथा व्याधियों से मुक्त हो जाता है. जो कोई व्यक्ति असाध्य रोग से पीड़ित है उसके लिए यह पाठ राम बाण सिद्ध होता है. यदि…

ग्रह, उनके मंत्र और जाप संख्या

हर ग्रह का अपना एक मंत्र हैं और मंत्रों का जाप कितनी संख्या में करना चाहिए यह भी हर ग्रह के लिए अलग है अर्थात हर ग्रह की जप संख्या अलग होती है. ग्रह का मंत्र और उनकी जप संख्या को तालिका द्वारा दर्शाया गया है. जब किसी ग्रह की महादशा आरंभ होती है तब…

राहु/केतु

राहु/केतु एक ही राक्षस था जिसका नाम स्वरभानु था. समुद्र मंथन के समय देवताओं को राक्षसों की सहायता लेनी पड़ी और उसके लिए कहा गया कि समुद्र से जो अमृत निकलेगा उसका रसपान राक्षसों को भी कराया जाएगा. अंत में जब अमृत निकला तब एक लाईन में देवता तो दूसरी लाईन में राक्षसों को बिठाया…

सूर्य भगवान के 108 नाम

सूर्योsर्यमा भगस्त्वष्टा पूषार्क: सविता रवि: । गभस्तिमानज: कालो मृत्युर्धाता प्रभाकर: ।।1।। पृथिव्यापश्च तेजश्च खं वयुश्च परायणम । सोमो बृहस्पति: शुक्रो बुधोsड़्गारक एव च ।।2।। इन्द्रो विश्वस्वान दीप्तांशु: शुचि: शौरि: शनैश्चर: । ब्रह्मा विष्णुश्च रुद्रश्च स्कन्दो वरुणो यम: ।।3।। वैद्युतो जाठरश्चाग्निरैन्धनस्तेजसां पति: । धर्मध्वजो वेदकर्ता वेदाड़्गो वेदवाहन: ।।4।। कृतं तत्र द्वापरश्च कलि: सर्वमलाश्रय: । कला काष्ठा…

राहु के मंत्र

राहु का अपना कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता है. यह एक छाया ग्रह है लेकिन छाया ग्रह होते हुए भी कुण्डली पर अपना अत्यधिक प्रभाव बनाये रखता है. राहु सदा अशुभ प्रभाव नही देता है. आधुनिक समय में बहुत सी नई टेक्नोलॉजी राहु के अधिकार क्षेत्र में आती है. इालिए हम इसे सदा अशुभ नहीं…

शुक्र के लिए मंत्र

शुक्र के निर्बल होने से जीवन में भोग विलास की कमी हो सकती है. मूत्र संबंधी परेशानियाँ हो सकती है. ऎसी स्थिति में शुक्र के मंत्र जाप करने चाहिए. शुक्र के किसी एक मंत्र का जाप शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से आरंभ करना चाहिए. शुक्र के मंत्र जाप सूर्योदय काल में करने चाहिए. शुक्र का…

चन्द्रमा के लिए मंत्र

वैदिक ज्योतिष और पौराणिक शास्त्रों में बहुत से मंत्रो का वर्णन हमें मिलता है. जन्म कुंडली में यदि चन्द्रमा शुभ होकर निर्बल अवस्था में है तब चंद्रमा के किसी भी एक मंत्र का जाप शुक्ल पक्ष के सोमवार अथवा पूर्णमासी से शुरु करना चाहिए. चन्द्रमा के मंत्र का जाप रात्रि समय में ही करना चाहिए….

शनि आरती

हर शनिवार को शनि महाराज की पूजा करने के बाद शनि आरती भी करनी चाहिए. इसलिए शनिदेव की कृपा उनके श्रद्धालुओ पर बनी रहती है. जिन पर शनि देव का प्रकोप जारी रहता है या शनि की ढैय्या अथवा शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहता है उन्हे हर शनिवार को शनि आरती अवश्य पढ़नी चाहिए….

मंगल के लिए मंत्र

ज्योतिष में सभी नौ ग्रह का अपना विशिष्ट महत्व होता है. सभी ग्रह अपनी दशा/अन्तर्दशा में अपने फल प्रदान करने की क्षमता रखते हैं.  यदि ग्रह शुभ होकर पीड़ित है तब उन्हें कई प्रकार से बली बनाया जा सकता है और यदि ग्रह कुंडली में अशुभ भाव का स्वामी है तब भी उसका उपचार किया…