वैशाख मास की अंतिम तीन तिथियों का महत्व

श्रुतदेव जी कहते हैं – राजेन्द्र ! वैशाख के शुक्ल पक्ष में जो अन्तिम तीन तिथियाँ, त्रयोादशी से पूर्णिमा तक, हैं वे बड़ी पवित्र और शुभ कारक हैं। उनका नाम “पुष्करिणी” हैं, वे सब पापों का क्षय करने वाली हैं। जो संपूर्ण वैशाख मास में स्नान करने में असमर्थ हैं, वह यदि इन तीन तिथियों…

वैशाख की अक्षय तृतीया और द्वादशी की महत्ता

श्रुतदेव जी कहते हैं – जो मनुष्य अक्षय तृतीया को सूर्योदय काल में प्रात: स्नान करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करके कथा सुनते हैं वे मोक्ष के भागी होते हैं। जो उस दिन श्रीमधुसूदन की प्रसन्नता के लिए दान करते हैं, उनका वह पुण्यकर्म भगवान की आज्ञा से अक्षय फल देता है। वैशाख…

वैशाख माहात्म्य – स्कन्द पुराण

वैशाख मास की श्रेष्ठता नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तम् । देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ।। अर्थ – भगवान नारायण, नरश्रेष्ठ नर, देवी सरस्वती तथा महर्षि वेदव्यास को नमस्कार करके भगवान की विजय-कथा से परिपूर्ण इतिहास-पुराण आदि का पाठ करना चाहिए।   सूतजी कहते हैं – राजा अम्बरीष ने परमेष्ठी ब्रह्मा के पुत्र देवर्षि नारद…

वैशाख-माहात्म्य प्रसंग में राजा महीरथ की कथा

यमराज कहते हैं – ब्रह्मन् ! पूर्वकाल की बात है, महीरथ नाम से विख्यात एक राजा थे। उन्हें अपने पूर्वजन्म के  पुण्यों के फलस्वरुप प्रचुर ऎश्वर्य और सम्पत्ति प्राप्त हुई थी परन्तु राजा राज्यलक्ष्मी का सारा भार मन्त्री पर रखकर स्वयं विषयभोग में आसक्त हो रहे थे। वे न प्रजा की ओर दृष्टि डालते थे…

तुलसीदल और अश्वत्थ(पीपल वृक्ष) की महिमा

ब्राह्मण ने पूछा – धर्मराज ! वैशाख मास में प्रात:काल स्नान करके एकाग्रचित्त हुआ पुरुष भगवान माधव का पूजन किस प्रकार करें? आप इसकी विधि का वर्णन करें। धर्मराज ने कहा – ब्रह्मन् ! पत्तों की जितनी जातियाँ हैं, उन सबमें तुलसी, भगवान श्रीविष्णु को अधिक प्रिय है। पुष्कर आदि जितने तीर्थ हैं, गंगा आदि…

वैशाख स्नान – यम/ब्राह्मण संवाद

नरक तथा स्वर्ग में जाने वाले कर्मों का वर्णन ऋषियों ने कहा – सूतजी ! इस विषय को पुन: विस्तार से कहिए। आपके उत्तम वचनामृतों का पान करते-करते हमें तृप्ति नहीं होती है। सूतजी बोले – महर्षियों ! इस विषय में एक प्राचीन इतिहास कहा करते हैं, जिसमें एक ब्राह्मण और महात्मा धर्मराज के संवाद…

वैशाख मास में स्नान, तर्पण, पूजन विधि और महिमा

अम्बरीष ने पूछा – मुने ! वैशाख माह के व्रत का क्या विधान है? इसमें किस तपस्या का अनुष्ठान करना पड़ता है? क्या दान होता है? कैसे स्नान किया जाता है और किस प्रकार भगवान केशव की पूजा की जाती है? ब्रह्मर्षे ! आप श्रीहरि के प्रिय भक्त तथा सर्वज्ञ हैं, अत: कृपा करके मुझे…

वैशाख-स्नान से पाँच प्रेतों का उद्धार

अम्बरीष ने कहा – मुने ! जिसके चिन्तन मात्र से पाप राशि का लय हो जाता है, उस पाप प्रशमन नामक स्तोत्र को मैं भी सुनना चाहता हूँ। आज मैं धन्य हूँ, अनुगृहीत हूँ, आपने मुझे उस शुभ विधि का श्रवण कराया, जिसके सुनने मात्र से पापों का क्षय हो जाता है। वैशाख मास में…

वैशाख – माहात्म्य

सूतजी कहते हैं – महात्मा नारद के वचन सुनकर राजर्षि अम्बरीष ने विस्मित होकर कहा – “महामुने ! आप मार्गशीर्ष (अगहन) आदि पवित्र महीनों को छोड़कर वैशाख मास की ही इतनी प्रशंसा क्यों करते हैं? उसी को सब मासों में श्रेष्ठ क्यों बतलाते हैं? यदि माधवमास सबसे श्रेष्ठ और भगवान लक्ष्मीपति को अधिक प्रिय है…

वैशाख माह – माहात्म्य

भगवद्भक्ति के लक्षण तथा वैशाख स्नान की महिमा अम्बरीष बोले – मुनिश्रेष्ठ ! आपने बड़ी अच्छी बात बतायी, इसके लिए आपको धन्यवाद है। आप संपूर्ण लोकों पर अनुग्रह करने वाले हैं। आपने भगवान विष्णु के सगुण एवं निर्गुण ध्यान का वर्णन किया, अब आप भक्ति का लक्षण बतलाइए। साधुओं पर कृपा करने वाले महर्षे !…

श्री ललिता त्रिशती

ऊँ ककार रूपा कल्याणी कल्याण गुण शालिनी। कल्याण शैलनिलया कमनीया कलावती।।1।। कमलाक्षी कल्मषघ्नी करुणामृतसागरा। कदम्ब कानन आवासा कदम्बकुसुमप्रिया।।2।। कंदर्पविद्या कंदर्प जन कापांग वीक्षणा। कर्पूर वीटी सौरभ्य कल्लोलित कुकुब् तटा।।3।। कलिदोषहरा कंजलोचना कम्रविग्रहा। कर्मादि साक्षिणी कारयित्री कर्मफलप्रदा।।4।। एकाररूपा च एकाक्षरी एकानेकाक्षराकृति:। एतत् अदित्य निर्देश्या च एकानंद चित् आकृति:।।5।। एवम् इति आगम बोध्या चैकभक्तिमदर्चिता। एकाग्रचित्तनिर्ध्याता चैषणारहितादृता।।6।। एला…

माघ माहात्म्य – उन्नीसवाँ अध्याय

वह पाँचों कन्याएँ इस प्रकार विलाप करती हुई बहुत देर प्रतीक्षा करके अपने घर लौटी. जब घर में आईं तो माताओं ने कहा कि इतना विलम्ब तुमने क्यों कर दिया तब कन्याओं ने कहा कि हम किन्नरियों के साथ क्रीड़ा करती हुई सरोवर पर थी और कहने लगी कि आज हम थक गई हैं और…