ग्रहों के यंत्र

किसी भी जातक की कुंडली में हर ग्रह की अपनी भूमिका होती है, कोई अच्छे तो कोई बुरे फल देने वाला होता है. अच्छे भावों के स्वामी यदि पीड़ित हैं तो उन्हें बली बनाने के लिए उन ग्रहों से संबंधित रत्न धारण करने की सलाह दे दी जाती है लेकिन जब बुरे भाव अथवा बुरे…

शनि की ढ़ैय्या व साढ़ेसाती के उपाय

शनि की ढैय्या तथा साढ़ेसाती से मिलने वाले कष्टों को दूर करने के बहुत से उपाय हैं जिनमें से कुछ उपायों के विषय में पाठकगणों को इस लेख के माध्यम से अवगत कराया जा रहा हैं. इन उपायों में से कोई भी उपाय पूरी श्रद्धा तथा विश्वास से करने पर अवश्य ही लाभ मिलता है….

श्रीगणेश जी के विभिन्न स्वरुपों का ध्यान

भगवान गणेश – Lord Ganesha  सिन्दूरवर्णं द्विभुजं गणेशं लम्बोदरं पद्मदले निविष्टम । ब्रह्मादिदेवै: परिसेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणमामि देवम ।।   हिन्दी अनुवाद   भगवान गणेश की अंगकान्ति सिन्दूर के समान है, उनकी दो भुजाएँ हैं, वे लम्बोदर हैं और कमल दल पर विराजमान हैं. ब्रह्मा आदि देवता उनकी सेवा में लगे हैं और वे सिद्धसमुदाय…

मंत्र जाप

भारतीय संस्कृति में मंत्र जाप की परंपरा पुरातन काल से ही चली आ रही है. मंत्र के जाप द्वारा आत्मा, देह और समस्त वातावरण शुद्ध होता है. छोटे से मंत्र अपने में असीम शक्ति का संचारण करने वाले होते हैं. इन मंत्र जापों के द्वारा ही व्यक्ति समस्त कठिनाईयों और परेशानियों से मुक्ति प्राप्त कर…

मंगल के लिए मंत्र

ज्योतिष में सभी नौ ग्रह का अपना विशिष्ट महत्व होता है. सभी ग्रह अपनी दशा/अन्तर्दशा में अपने फल प्रदान करने की क्षमता रखते हैं.  यदि ग्रह शुभ होकर पीड़ित है तब उन्हें कई प्रकार से बली बनाया जा सकता है और यदि ग्रह कुंडली में अशुभ भाव का स्वामी है तब भी उसका उपचार किया…

बुध के लिए मंत्र जाप

बुध ग्रह को ग्रहों में राजकुमार की उपाधि दी गई है लेकिन जन्म कुंडली में यदि बुध अशुभ ग्रहों के साथ है तो यह अशुभ होता है और यदि शुभ ग्रहों के प्रभाव में है तो यह शुभ फल प्रदान करता है. ऎसी स्थिति में इस ग्रह पर एक कहावत चरितार्थ होती है जो इस…