गोविन्दाष्टकम्

चिदानन्दाकारं श्रुतिसरससारं समरसं निराधाराधारं भवजलधिपारं परगुणम्। रमाग्रीवाहारं व्रजवनविहारं हरनुतं सदा तं गोविन्दं परमसुखकन्दं भजत रे।।1।।   महाम्भोधिस्थानं स्थिरचरनिदानं दिविजपं सुधाधारापानं विहगपतियानं यमरतम्। मनोज्ञं सुज्ञानं मुनिजननिधानं ध्रुवपदं ।सदा0।।2।।   धिया धीरैर्ध्येयं श्रवणपुटपेयं यतिवरै- र्महावाक्यैर्ज्ञेयं त्रिभुवनविधेयं विधिपरम्। मनोमानामेयं सपदि हृदि नेयं नवतनुं।सदा0।।3।।   महामायाजालं विमलवनमालं मलहरं सुभालं गोपालं निहतशिशुपालं शशिमुखम्। कलातीतं कालं गतिहतमरालं मुररिपुं।सदा0।।4।।   नभोबिम्बस्फीतं निगमगणगीतं…

अच्युताष्टकम्

अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्। श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे।।1।।   अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरमं राधिकाराधितम्। इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं नन्दजं सन्दधे।।2।।   विष्णवे जिष्णवे शंखिने चक्रिणे रुक्मिणीरागिणे जानकीजानये। वल्लवीवल्लभायार्चितायात्मने कंसविध्वंसिने वंशिने ते नम:।।3।।   कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे। अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक।।4।।   राक्षसक्षोभित: सीतया शोभितो…

वेदसारशिवस्तव:

पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य    कृत्तिं    वसानं    वरेण्यम्। जटाजूटमध्ये स्फुरद्गांगवारिं महादेवमेकं स्मरामि     स्मरारिम्।।1।।   महेशं सुरेशं सुरारार्तिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यंगभूषम्। विरूपाक्षमिन्द्वर्कवह्नित्रिनेत्रं सदानन्दमीडे प्रभुं             पंचवक्त्रम्।।2।।   गिरीशं   गणेशं      गले        नीलवर्णं गवेन्द्राधिरूढ़ं गणातीतरूपम्। भवं भास्वरं  भस्मना      भूषितांग भवानीकलत्रं        भजे          पंचवक्त्रम्।।3।।   शिवाकान्त     शम्भो       शशांकार्धमौले महेशान शूलिन् जटाजूटधारिन्। त्वमेको         जगद्व्यापको     विश्वरूप प्रसीद         प्रसीद       प्रभो      पूर्णरूप।।4।।   परात्मानमेकं जगद्वीजमाद्यं…

मधुराष्टकम्

मधुराष्टकम में श्याम सलोने कृष्ण भगवान के स्वरुप का चित्रण किया गया, जिसमें उनके सभी अदाओं की व्याख्या की गई है.  इस स्तुति में भगवान की एक अलग छवि उभरकर सामने आती है. अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्।।1।।   वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं…

भजनावली 108

ये भजनों की पुस्तक मेरी माताजी द्वारा लिखी गई हैं जिसका नाम “भजनावली संग्रह 108” रखा गया है. इसके सभी भजनों को मैं अपने ब्लॉग पर भी पोस्ट करना चाहती हूँ, जो सभी पाठकों को समर्पित रहेगें. जीवन है एक जुआ, जीत गए तो भव को उतर गए नहीं तो अपने जीवन का प्राणी कर…