श्री ललिता सौभाग्य कवच स्तोत्रम्

शिखाग्रं सततं पातु मम त्रिपुर-सुन्दरी। शिर: कामेश्वरी नित्या तत् पूर्वं भग-मालिनी।।1।। नित्य-क्लिन्नाSवताद्दक्षं भेरुण्डा तस्य पश्चिमम् । वह्नि-वासिन्यवेद् वामं मुखं विद्येश्वरी तथा।।2।। शिव-दूती ललाटं मे त्वरिता त्सय दक्षिणम् । तद् – वाम – पार्श्वमवतात् तथैव कुल – सुन्दरी।।3।। नित्या पातु भ्रुर्वोमध्यं भ्रुवं नील – पताकिनी। वाम – भ्रुवं तु विजया नयनं सर्व – मंगला।।4।। ज्वाला –…

शनि कवच

शनि ग्रह की पीड़ा से बचने के लिए अनेकानेक मंत्र जाप, पाठ आदि शास्त्रों में दिए गए हैं. शनि ग्रह के मंत्र भी कई प्रकार हैं और कवच का उल्लेख भी मिलता है. युद्ध क्षेत्र में जाने से पूर्व सिपाही अपने शरीर पर एक लोहे का कवच धारण करता था ताकि दुश्मनों के वार से…

श्रीशनि वज्रपंजर कवच

आधुनिक समय में हर व्यक्ति शनि के नाम से भयभीत रहता है. इसका कारण शनि के विषय में फैली गलत भ्राँतियाँ भी हैं. शनि ग्रह किसी व्यक्ति को कैसे फल देगा, ये जन्म कुंडली में शनि की स्थिति तथा योगों पर निर्भर करता है. कई बार योगकारी होते भी अपनी दशा/अन्तर्दशा में शनि पूरे फल…

मार्गशीर्ष माह में श्रीपंचमी व्रत कथा

एक बार राजा युधिष्ठिर जी श्रीकृष्ण जी से पूछते हैं – “भगवन तीनों लोकों में लक्ष्मी दुर्लभ है लेकिन व्रत, होम, तप, जप, नमस्कार आदि किस कर्म के करने से स्थिर लक्ष्मी प्राप्त होती हैं? भगवन ! आप सब कुछ जानने वाले हैं इसलिए कृपा कर इसका वर्णन करें. भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं – महाराज…