अथ कीलकम्

ऊँ अस्य श्रीकीलकमन्त्रस्य शिव ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, श्रीमहासरस्वती देवता, श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थं सप्तशतीपाठांगत्वेन जपे विनियोग: ।   ऊँ नमश्चण्डिकायै ।।   मार्कण्डेय

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भैरव स्तोत्र

ॐ महाकाल भैरवाय नम: जलद् पटलनीलं दीप्यमानोग्रकेशं, त्रिशिख डमरूहस्तं चन्द्रलेखावतंसं! विमल वृष निरुढं चित्रशार्दूलवास:, विजयमनिशमीडे विक्रमोद्दण्डचण्डम्!!   सबल बल विघातं

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कार्तिक मास में तुलसी की महिमा 

ब्रह्मा जी कहते हैं – “जो भक्त कार्तिक महीने में ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर पवित्र हो तुलसी दल से

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