महाभागवत – देवीपुराण – पैंतीसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में गणेश जन्म की कथा का वर्णन है, पार्वती द्वारा अपने उबटन से विष्णुस्वरुप एक पुत्र की उत्पत्ति

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जन्म कुंडली के अनुसार समस्याएँ और उनका मंंत्रोपचार 

जन्म कुंडली में मौजूद दोषों के कारण व्यक्ति को जीवन में अनेकों बार असफलताओं का सामना करना पड़ता है. इन

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महाभागवत – देवी पुराण – चौबीसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में भगवान शंकर द्वारा पार्वती के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखना है, मरीचि आदि ऋषियों का हिमालय के

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महाभागवत – देवी पुराण – बाईसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में ब्रह्माजी का तारकासुर से पीड़ित देवताओं को भगवान शंकर के पुत्र द्वारा उसके वध की बात बतलाना

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महाभागवत – देवी पुराण – उन्नीसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में हिमालय को तत्त्व ज्ञान का उपदेश प्रदान कर देवी का सामान्य बालिका की भाँति क्रीडा करना है,

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महाभागवत – देवी पुराण – सत्रहवाँ अध्याय 

इस अध्याय में भगवती गीता के वर्णन में ब्रह्मयोग का उपदेश, पाँचभौतिक देह, गर्भस्थ जीव का स्वरुप तथा गर्भ में

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महाभागवत – देवीपुराण – पंद्रहवाँ अध्याय 

इस अध्याय में हिमालय और मेना की तपस्या से प्रसन्न हो आद्यशक्ति का “पार्वती” नाम से हिमालय के यहाँ प्रकट

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