श्री शनि अष्टोत्तर शतनामावली 

ऊँ श्री शनैश्चराय नमः। ऊँ शान्ताय नमः। ऊँ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः। ऊँ शरण्याय नमः। ऊँ वरेण्याय नमः। ऊँ सर्वेशाय नमः। ऊँ

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महाभागवत – देवीपुराण – पैंतीसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में गणेश जन्म की कथा का वर्णन है, पार्वती द्वारा अपने उबटन से विष्णुस्वरुप एक पुत्र की उत्पत्ति

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महाभागवत – देवीपुराण – चौंतीसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में देवताओं द्वारा कार्तिकेय की वन्दना, ब्रह्माजी के साथ कार्तिकेय का अपने माता-पिता के पास कैलास आना, भगवान

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जन्म कुंडली के अनुसार समस्याएँ और उनका मंंत्रोपचार 

जन्म कुंडली में मौजूद दोषों के कारण व्यक्ति को जीवन में अनेकों बार असफलताओं का सामना करना पड़ता है. इन

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महाभागवत – देवीपुराण – तैंतीसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में कार्तिकेय जी द्वारा तारकासुर का वध, देवसेना में हर्षोल्लास का वर्णन किया गया है.  श्रीमहादेवजी बोले –

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महाभागवत – देवी पुराण – बत्तीसवाँ अध्याय 

इस अध्याय में देवासुर-संग्राम में देवसेनापति कार्तिकेय तथा तारकासुर के भीषण युद्ध का वर्णन है.  श्रीमहादेवजी बोले – तुरही के

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महाभागवत – देवी पुराण – इकतीसवाँ अध्याय

इस अध्याय में कुमार कार्तिकेय का तारकासुर के विनाश के लिए ससैन्य उद्यत होना है, ब्रह्माजी द्वारा उन्हें वाहन के

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