ऋण मोचन मंगल स्तोत्र
मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः। स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः।। लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः। धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः।। अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः।
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मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः। स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः।। लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः। धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः।। अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः।
सौर मास और चांद्र मास में सामंजस्य बनाए रखने के लिए अधिकमास की परिकल्पना हमारे पूर्व विद्वानों द्वारा की गई
First Chapter – Pahla Adhyay Once upon a time, in the sacred forest of Naimisharanya, a great spiritual gathering took
शिवपुराण, लिंगपुराण तथा स्कन्द पुराण आदि में रुद्राक्ष के महत्व और माहात्म्य का विशेषरूप से उल्लेख किया गया है। रुद्राक्ष
प्रथम भाव (लग्न) – अहं से आत्मा तक केतु लग्न में – आत्मा पूर्वजन्म में स्वयं पर काम कर चुकी
वैदिक ज्योतिष में वक्री ग्रह जिस भाव में स्थित होता है, उस भाव से संबंधित पूर्वजन्मीय कर्म अधूरे माने जाते