गरुड़ पुराण – तीसरा अध्याय

गरुड़ उवाच गरुड़ जी ने कहा – हे केशव ! यम मार्ग की यात्रा पूरी कर के यम के भवन में जाकर पापी किस प्रकार की यातना को भोगता है? वह मुझे बतलाइए।   श्रीभगवानुवाच श्री भगवान बोले – हे विनता के पुत्र गरुड़्! मैं नरक यातना को आदि से अन्त तक कहूँगा, सुनो। मेरे…

दस महाविद्या – षोडशी

षोडशी माहेश्वरी शक्ति की सबसे मनोहर श्रीविग्रहवाली सिद्ध देवी हैं. महाविद्याओं में इनका चौथा स्थान है। सोलह अक्षरों के मन्त्रवाली इन देवी की अंगकान्ति उदीयमान सूर्यमण्डल की आभा की भाँति है। इनकी चार भुजाएँ और तीन नेत्र है। ये शान्त मुद्रा में लेटे हुए सदाशिव पर स्थित कमल के आसन पर आसीन है। इनके चारों…

गरुड़ पुराण – दूसरा अध्याय

गरुड़ उवाच – Garuda Uvach गरुड़ जी ने कहा – हे केशव ! यमलोक का मार्ग किस प्रकार दु:खदायी होता है। पापी लोग वहाँ किस प्रकार जाते हैं, वह मुझे बताइये। श्रीभगवानुवाच – Shri Bhagwanuvach श्री भगवान बोले – हे गरुड़ ! महान दुख प्रदान करने वाले यममार्ग के विषय में मैं तुमसे कहता हूँ,…

गरुड़ पुराण – पहला अध्याय

(भगवान विष्णु तथा गरुड़ के संवाद में गरुड़ पुराण – पापी मनुष्यों की इस लोक तथा परलोक में होने वाली दुर्गति का वर्णन, दश गात्र के पिण्डदान से यातना देह का निर्माण।) धर्म ही जिसका सुदृढ़ मूल है, वेद जिसका स्कन्ध(तना) है, पुराण रूपी शाखाओं से जो समृद्ध है, यज्ञ जिसका पुष्प है और मोक्ष…

दशमहाविद्या – छिन्नमस्ता/छिन्नमस्तिका

भगवती छिन्नमस्तिका का स्वरुप अत्यन्त ही गोपनीय है, इसे कोई साधक ही जान सकता है. दशमहाविद्याओं में इनका तीसरा स्थान है. इनके प्रादुर्भाव की कथा इस प्रकार से है – एक बार भगवती भवानी अपनी सहचरी जया और विजया के साथ मन्दाकिनी में स्नान के लिए गईं. स्नान करने के बाद क्षुधाग्नि (भूख) से पीड़ित…

कुंडली के 12 भावों से रोग का आंकलन

जन्म कुंडली के 12 भावों से रोगों की पहचान की जाती और घटनाओं का आंकलन भी किया जाता है. जन्म कुंडली के पहले भाव से लेकर बारहवें भाव तक शरीर के विभिन्न अंगों को देखा जाता है और जिस अंग में पीड़ा होती है तो उस अंग से संबंधित भाव अथवा भावेश की भूमिका रोग…

दशमहाविद्या – तारा

भगवती काली को ही नीलरुपा होने के कारण तारा भी कहा गया है. वचनान्तर से तारा नाम का रहस्य यह भी है कि ये सर्वदा मोक्ष देने वाली, तारने वाली हैं इसलिए इन्हें तारा भी कहा जाता है. महाविद्याओं में ये द्वितीय स्थान पर परिगणित हैं. अनायास ही वाकशक्ति प्रदान करने में समर्थ हैं इसलिए…

देवी षष्ठी की कथा

प्राचीन समय में प्रियव्रत नाम के एक बहुत प्रसिद्ध राजा हुए, इनके पिता का नाम स्वायम्भुव मनु था. प्रियव्रत योगीराज थे और इस कारण विवाह भी नहीं करना चाहते थे. तपस्या में इनकी विशेष रुचि थी लेकिन ब्रह्माजी की आज्ञा तथा सत्प्रयत्न के प्रभाव से उन्होंने विवाह कर लिया. विवाह के काफी वर्ष बीत जाने…

प्रदोषस्तोत्रम्

जय देव जगन्नाथ जय शंकर शाश्वत । जय सर्वसुराध्यक्ष जय सर्वसुरार्चित ।।1।। जय सर्वगुणातीत जय सर्ववरप्रद । जय नित्यनिराधार जय विश्वम्भराव्यय।।2।। जय विश्वैकवन्द्येश जय नागेन्द्रभूषण । जय गौरीपते शम्भो जय चन्द्रार्धशेखर ।।3।। जय कोट्यर्कसंकाश जयानन्तगुणाश्रय । जय भद्र विरूपाक्ष जयाचिन्त्य निरंजन ।।4।। जय नाथ कृपासिन्धो जय भक्तार्तिभंजन । जय दुस्तरसंसारसागरोत्तारण प्रभो ।।5।। प्रसीद मे महादेव…

दशमहाविद्या – काली

दस महाविद्याओं में काली का प्रथम स्थान है. महाभागवत के अनुसार महाकाली ही मुख्य हैं और उनके उग्र तथा सौम्य दो रुपों में से ही अनेक रुप धारण करने वाली दस महाविद्याएँ हैं. भगवान शिव की शक्तियाँ ये महाविद्याएँ अनन्त सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं. माना जाता है कि महाकाली या काली ही समस्त…

भद्रा तिथियाँ दिसंबर 2018

तिथि /Dates समय/Time 1 दिसंबर 26:41 से अगले दिन दोपहर 14:01 तक 5 दिसंबर 12:03 से 24:08 तक 11 दिसंबर 07:06 से 20:22 तक 15 दिसंबर 04:16 से 17:15 तक 18 दिसंबर 19:47 से अगले दिन सुबह 07:36 तक 21 दिसंबर 26:09 से अगले दिन 12:44 तक 25 दिसंबर 03:24 से 13:48 तक 28 दिसंबर…

भद्रा तिथियाँ नवंबर 2018

तिथि /Dates समय/Time 2 नवंबर 18:11 से सुबह 05:11 तक 5 नवंबर 23:47 से अगले दिन सुबह 10:07 तक 11 नवंबर 10:59 से 23:45 तक 15 नवंबर 07:05 से 20:23 तक 18 नवंबर 26:02 से अगले दिन 14:30 तक 22 नवंबर 12:54 से 24:02 तक 25 नवंबर 17:23 से सुबह 04:07 तक 28 नवंबर 20:52…