श्रीराम स्तोत्र

ऊँ श्रीरामो रामचन्द्रश्च रामभद्रश्च शाश्वत:। राजीवलोचन: श्रीमान् राजेन्द्रो रघुपुंगव: ।। जानकीवल्लभो जैत्रो जितामित्रो जनार्दन:। विश्वामित्रप्रियो दान्त: शरण्यत्राणतत्पर:।। वालिप्रमथनो वाग्मी सत्यवाक्

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काशीपञ्चकम्

मनोनिवृत्ति: परमोपशान्ति: सा तीर्थवर्या मणिकर्णिका च। ज्ञानप्रवाहा विमलादिगंगा सा काशिकाSहं निजबोधरूपा।।1।।   यस्यामिदं कल्पितमिन्द्रजालं चराचरं भाति मनोविलासम्। सच्चित्सुखैका परमात्मरूपा सा

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श्रीकालिकाष्टकम्

ध्यानम् गलदरक्तमुण्डावलीकण्ठमाला महाघोररावा सुदंष्ट्रा कराला। विवस्त्रा श्मशानालया मुक्तकेशी महाकालकामाकुला कालिकेयम्।।1।। अर्थ – ये भगवती कालिका गले में रक्त टपकते हुए

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