प्रेम अथवा अंतर्जातीय विवाह के ज्योतिषीय योग – भाग 3

इससे पहले हम भाग 1 और भाग 2 में प्रेम अथवा अन्तर्जातीय विवाह के योगों के विषय में चर्चा कर चुके हैं. इस भाग में हम चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कुछ और योगों की बात करेगें जिनके कुंडली में बनने पर मान्यताओं से हटकर विवाह होता है. यदि किसी जन्म कुंडली में पाप ग्रहों…

प्रेम अथवा अंतर्जातीय विवाह के ज्योतिषीय योग – भाग 2

भाग एक में कई तरह के ज्योतिषीय योगों की चर्चा की गई हैं जिनके जन्म कुंडली में होने पर जातक का प्रेम विवाह होता है अथवा अन्तर्जातीय विवाह के योग भी बनते हैं. इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए इस दूसरे भाग में भी उन्हीं योगों की चर्चा को आगे बढ़ाया जाएगा. जातक की जन्म…

प्रेम विवाह अथवा अंतर्जातीय विवाह के ज्योतिषीय योग – भाग 1

वर्तमान समय में युवक-युवतियाँ जहाँ हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहें है वहाँ एक-दूसरे के प्रति आकर्षण होना भी आम बात हो गई है और यह आकर्षण कब प्रेम का रुप ले लेता है पता ही नहीं चलता. ऎसे में प्रेम विवाह होना कोई आश्चर्य की बात नहीं रह गई है….

भारतीय ज्योतिष में विवाह के प्रकार

  प्राचीन काल के विद्वानों ने आठ प्रकार के विवाहों का उल्लेख किया है जो निम्नलिखित प्रकार के होते थे. इनमें से कई विवाह तो अब समाप्त हो चुके हैं लेकिन फिर भी हम सभी आठों प्रकार के विवाह का संक्षिप्त वर्णन कर रहे हैं.   1) ब्रह्म विवाह – Brahma Marriage यह विवाह प्राचीन…

अश्लेषा नक्षत्र और व्यवसाय

अश्लेषा नक्षत्र कर्क राशि में 16 अंश 40 कला से 30 अंश तक रहता है. इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है. इस नक्षत्र के अन्तर्गत निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं :- इस नक्षत्र के अन्तर्गत नशीले पदार्थों का कार्य, विष से संबंधित व्यवसाय, कीटनाशक दवाएँ, विष द्वारा उपचार के कार्य, दवाईयाँ भी विष की श्रेणी…

वास्तु तथा पंचतत्वों का संबंध

प्राचीन समय से ही विद्वानों का मत रहा है कि इस सृष्टि की संरचना पांच तत्वों से मिलकर हुई है. सृष्टि में इन पंचतत्वों का संतुलन बना हुआ है. यदि यह संतुलन बिगड़ गया तो यह प्रलयकारी हो सकता है. जैसे यदि प्राकृतिक रुप से जलतत्व की मात्रा अधिक हो जाती है तो पृथ्वी पर…

घर का वास्तु

एक अच्छा घर – सभी की चाहत होती है लेकिन हमारे बीच मौजूद कितने व्यक्ति इस सपने को पूरा नहीं कर पाते. घर बनाने का सपना जिन लोगों का पूरा होता है वह भाग्यशाली होते हैं. अपने सपनों का महल बनाने से पहले यदि हम कुछ बातों पर ध्यान दे तो यह घर सुख तथा…

पुष्य नक्षत्र

पुष्य नक्षत्र कर्क राशि में 3अंश(Degree) 20 कला(MInute) से 16 अंश 40 कला तक रहता है. इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है. इस नक्षत्र में सभी प्रकार के डेयरी उद्योग, हर प्रकार का पशु पालन उद्योग, कृषि कर्म आदि इस नक्षत्र में आते हैं. जो लोग खाद्य पदार्थ बेच कर या बना कर अपनी…

पुनर्वसु नक्षत्र

पुनर्वसु नक्षत्र का विस्तार मिथुन राशि में 20 अंश(Degree) से कर्क राशि(Cancer Sign) में 3 अंश(Degree) 20 कला(Minute) तक रहता है. पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी ग्रह गुरू है. होटल, रेस्तरां व्यवसाय, पर्यटन व्यवसाय, अंतरिक्षयान सेवा, परिवहन सेवा मे कार्यरत कर्मचारी, आदि पुनर्वसु नक्षत्र में आने वाली सेवायें है. सिनेमा, रेडियो तथा दूरदर्शन के कलाकर, उपग्रह…

आर्द्रा नक्षत्र

आर्द्रा नक्षत्र मिथुन राशि में 6 अंश(Degree) 40 कला(Minute) से लेकर 20 अंश तक रहता है.  आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है. विद्युत उपकरणो की मरम्मत करने वाला कारीगर, विद्युत अभियंता, विशेष परिश्रम करने वाले, शारीरिक श्रम में मजदूर वर्ग तथा मानसिक श्रम में वैज्ञानिक, गणितज्ञ, शोधकर्ता, उपन्यासकार, लेखक, दार्शनिक, आदि इस नक्षत्र में…

मृगशिरा नक्षत्र

मृगशिरा नक्षत्र वृष राशि में 23 अंश(Degree) 20 कला(Minute) से लेकर मिथुन राशि में 6 अंश 40 कला तक रहता है. मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है. मृगशिरा नक्षत्र में सभी प्रकार के गायक, संगीतज्ञ, कवि आदि आते हैं. इस नक्षत्र में चित्रकार, भाषाविद, सभी प्रकार के लेखक, विचारक और मनीषी आते हैं. रोमांटिक…

रोहिणी नक्षत्र

रोहिणी नक्षत्र वृष राशि में 10 अंश से 23 अंश 20 कला तक रहता है. इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह चन्द्रमा है. रोहिणी नक्षत्र में वे सभी कार्य आते हैं जिनमें खाद्य पदार्थों को उगाकर, उन्हें विकसित तथा संशोधित करके जातक अपनी आजीविका चलाता है. पेड़ – पौधों से संबंधित वैज्ञानिक व शोधकर्ता आदि, वनस्पतियों…