श्री ललिता त्रिशती

ऊँ ककार रूपा कल्याणी कल्याण गुण शालिनी। कल्याण शैलनिलया कमनीया कलावती।।1।। कमलाक्षी कल्मषघ्नी करुणामृतसागरा। कदम्ब कानन आवासा कदम्बकुसुमप्रिया।।2।। कंदर्पविद्या कंदर्प

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दशमहाविद्या – त्रिपुरभैरवी

क्षीयमान विश्व के अधिष्ठान दक्षिणामूर्ति कालभैरव हैं और उनकी शक्ति ही त्रिपुरभैरवी है। ये ललिता या महात्रिपुरसुन्दरी की रथवाहिनी हैं।

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विष्णु षटपदी

अविनयमपनयविष्णो दमयं मन: शमयविषयमृगतृष्णां । भूतदयां विस्तारय तारय संसारसागरात:।।1।। अर्थ – हे विष्णु भगवान ! मेरी उद्दण्डता दूर कीजिए. मेरे

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तन्त्रोक्तं रात्रिसूक्तम्

{योगनिद्रास्तुति:} ऊँ विश्वेश्वरीं जगद्धात्रीं स्थितिसंहारकारिणीम्। निद्रां भगवतीं विष्णोरतुलां तेजस: प्रभु:।।1।। अर्थ – जो इस विश्व की अधीश्वरी, जगत को धारण

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