कार्तिक माह की पाँच की एक कहानी

कार्तिक माह में बहुत सी कहानियाँ कही जाती हैं लेकिन अब जो कहानी बताई जा रही है वह एक ही कहानी की जाती है. एक ब्राह्मण और ब्राह्मणी थे, वो सात कोस दूर गंगा जमुना स्नान करने जाते थे. रोज इतनी दूर आने-जाने से ब्राह्मणी थक जाती थी. एक दिन ब्राह्मणी कहती है कि कोई…

श्री काली चालीसा

चौपाई जय काली जगदम्ब जय, हरनि ओघ अघ पुंज। वास करहु निज दास के, निशदिन हृदय निकुंज।। जयति कपाली कालिका, कंकाली सुख दानि। कृपा करहु वरदायिनी, निज सेवक अनुमानि।। चौपाई जय जय जय काली कपाली । जय कपालिनी, जयति कराली।। शंकर प्रिया, अपर्णा, अम्बा । जय कपर्दिनी, जय जगदम्बा।। आर्या, हला, अम्बिका, माया । कात्यायनी…

श्री सरस्वती चालीसा

दोहा -Doha जनक जननि पदम दुरज, निजब मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि।। पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। दुष्टजनों के पाप को, मातु तुही अब हन्तु।।   जय श्रीसकल बुद्धि बलरासी।जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी।। जय जय जय वीणाकर धारी।करती सदा सुहंस सवारी।। रूप चतुर्भुज धारी माता।सकल विश्व अन्दर…

महालक्ष्म्यष्टकम्

इन्द्र उवाच नमस्तेSस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोSस्तु ते।।1।। अर्थ – इन्द्र बोले – श्रीपीठ पर स्थित और देवताओं से पूजित होने वाली हे महामाये! तुम्हें नमस्कार है. हाथ में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली हे महाल़मि! तुम्हें प्रणाम है.   नमस्ते     गरुडारूढे     कोलासुरभयंकरि। सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोSस्तु ते।।2।। अर्थ – गरुड़…

स्वधा स्तोत्रम्

ब्रह्मोवाच – Brahmovach स्वधोच्चारणमात्रेण तीर्थस्नायी भवेन्नर:। मुच्यते सर्वपापेभ्यो वाजपेयफलं लभेत्।।1।। अर्थ – ब्रह्मा जी बोले – ‘स्वधा’ शब्द के उच्चारण से मानव तीर्थ स्नायी हो जाता है. वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर वाजपेय यज्ञ के फल का अधिकारी हो जाता है.   स्वधा स्वधा स्वधेत्येवं यदि वारत्रयं स्मरेत्। श्राद्धस्य फलमाप्नोति कालस्य तर्पणस्य च।।2।। अर्थ…

शीतलाष्टकम्

अस्य श्रीशीतलास्तोत्रस्य महादेव ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, शीतला देवता, लक्ष्मी बीजम्, भवानी शक्ति:, सर्व-विस्फोटकनिवृत्तय अर्थ – इस श्रीशीतला स्तोत्र के ऋषि महादेव जी, छन्द अनुष्टुप, देवता शीतला माता, बीज लक्ष्मी जी तथा शक्ति भवानी देवी हैं. सभी प्रकार के विस्फोटक, चेचक आदि, के निवारण हेतु इस स्तोत्र का जप में विनियोग होता है.   ईश्वर उवाच…

श्रीसरस्वती स्तोत्रम्

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा।।1।।   आशासु राशीभवदंगवल्ली – भासैव दासीकृतदुग्धसिन्धुम् । मन्दस्मितैर्निन्दितशारदेन्दुं वन्देSरविन्दासनसुन्दरि त्वाम्।।2।।   शारदा शारदाम्भोजवदना    वदनाम्बुजे। सर्वदा       सर्वदास्माकं       सन्निधिं       क्रियात्।।3।।   सरस्वतीं     च   तां   नौमि   वागधिष्ठातृदेवताम्। देवत्वं        प्रतिपद्यन्ते      यदनुग्रहतो      जना:।।4।।   पातु    नो    निकषग्रावा    मतिहेम्न:   सरस्वती । प्राज्ञेतरपरिच्छेदं वचसैव…

श्री लक्ष्मी नारायण 108 नामावली

1) ऊँ श्री अनन्तान्त रूपाय नम: 2) ऊँ श्री अक्रूराय नम: 3) ऊँ श्री अपमृत्यु बिनाशाय नम: 4) ऊँ श्री उज्ज्वलाय नम: 5) ऊँ श्री आत्मज्योतिषे नम: 6) ऊँ श्री अरण्डतत्व रूपाय नम: 7) ऊँ श्री कूष्माण्ड गण नाथाया नम: 8) ऊँ श्री अतीन्द्रीया नम: 9) ऊँ श्री केशिसहायकाय नम: 10) ऊँ श्री कालबक्राय नम:…

नीलसरस्वती स्तोत्रम्

घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयंकरि। भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।1।। ऊँ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते। जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।2।। जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि। द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।3।। सौम्यक्रोधधरे रूपे चण्डरूपे नमोSस्तु ते। सृष्टिरूपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम्।।4।। जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला। मूढ़तां हर मे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।5।। वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नम:। उग्रतारे…

खग्रास सूर्यग्रहण 21/22 अगस्त 2017

यह सूर्यग्रहण भाद्रपद अमावस्या, दिन सोमवार, अगस्त माह की 21/22 की अर्धरात्रि में लगेगा(भारतीय समयानुसार आधी रात). भारतीय समयानुसार ग्रहण का प्रभाव रात के 9 बजकर 16 मिनट से रात्रि 2 बजकर 34 मिनट तक भूगोल पर रहेगा लेकिन भारतीय समय के अनुसार यह सूर्यग्रहण रात में घटित होगा जिससे भारत के किसी भी भाग…

कामेश्वरीस्तुति:

युधिष्ठिर उवाच – Yudhishthir Uvach नमस्ते परमेशानि ब्रह्मरूपे सनातनि। सुरासुरजगद्वन्द्ये कामेश्वरि नमोSस्तु ते।।1।।   न ते प्रभावं जानन्ति ब्रह्माद्यास्त्रिदशेश्वरा:। प्रसीद जगतामाद्ये कामेश्वरि नमोSस्तु ते।।2।।   अनादिपरमा विद्या देहिनां देहधारिणी। त्वमेवासि जगद्वन्द्ये कामेश्वरि नमोSस्तु ते।।3।।   त्वं बीजं सर्वभूतानां त्वं बुद्धिश्चेतना धृति:। त्वं प्रबोधश्च निद्रा च कामेश्वरि नमोSस्तु ते।।4।।   त्वामाराध्य महेशोSपि कृतकृत्यं हि मन्यते। आत्मानं…

महालक्ष्मीस्तुति:

अगस्तिरुवाच – Agastiruvach मातर्नमामि कमले कमलायताक्षि श्रीविष्णुहृत्कमलवासिनि विश्वमात:। क्षीरोदजे  कमलकोमलगर्भगौरि लक्ष्मि प्रसीद सततं नमतां शरण्ये।।1।। त्वं श्रीरुपेन्द्रसदने मदनैकमात – र्ज्योत्स्नासि चन्द्रमसि चन्द्रमनोहरास्ये। सूर्ये प्रभासि च जगत्त्रितये प्रभासि लक्ष्मि प्रसीद सततं नमतां शरण्ये।।2।। त्वं जातवेदसि सदा दहनात्मशक्ति – र्वेधास्त्वया जगदिदं विविधं विदध्यात्। विश्वम्भरोSपि बिभृयादखिलं भवत्या लक्ष्मि प्रसीद सततं नमतां शरण्ये।।3।। त्वत्त्यक्तमेतदमले हरते हरोSपि त्वं पासि हंसि…