महाभागवत – देवी पुराण – चौहत्तरवाँ अध्याय
श्रीमहादेवजी बोले – मुनिश्रेष्ठ ! ज्ञानपूर्वक गङ्गा में देहत्याग करने वाला मनुष्य पाप से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर लेता
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श्रीमहादेवजी बोले – मुनिश्रेष्ठ ! ज्ञानपूर्वक गङ्गा में देहत्याग करने वाला मनुष्य पाप से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर लेता
श्रीमहादेव जी बोले – मुनिश्रेष्ठ ! ब्रह्महत्या करने वाला, गोवध करने वाला, सुरापान करने वाला तथा गुरु पत्नीगामी महापापी भी
श्रीमहादेव जी बोले – ये पुण्यमयी गङ्गा अपना दर्शन करने तथा अपने जल का स्पर्श करने मात्र से प्राणियों के
श्रीमहादेवजी बोले – महामुने ! तब भगवती गङ्गा समुद्र के साथ संयुक्त हो विवर से होकर अत्यन्त प्रसन्नतापूर्वक पाताल पहुँचकर
श्रीमहादेव जी बोले – इस प्रकार महादेवी गङ्गा बहुत योजन दूरी को पारकर उन महात्मा राजा भगीरथ के साथ हरिद्वार
श्रीमहादेव जी बोले – ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को महापापी जनों के भी उद्धार के लिए