महाभागवत – देवी पुराण – बासठवाँ अध्याय
श्रीमहादेवजी बोले – नारदजी ! कुछ देर मौन रहकर कमललोचन भगवान् विष्णु ने मीठी वाणी में देवराज इंद्र से कहा
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श्रीमहादेवजी बोले – नारदजी ! कुछ देर मौन रहकर कमललोचन भगवान् विष्णु ने मीठी वाणी में देवराज इंद्र से कहा
श्रीमहादेव जी बोले – महामते ! युद्ध में दुर्धर्ष वृत्रासुर का संहार करके ऐरावत हाथी पर आरूढ़ होकर सभी देवगणों
श्रीनारद जी बोले – देवदेव ! महेश्वर ! प्रभो ! जिस तरह से इंद्र को ब्रह्महत्या का पाप लगा, जिस
श्रीनारदजी बोले – देवदेव ! जगन्नाथ ! कृपामय ! जगत्प्रभो ! मैं पुनः आप से भगवती का उत्कृष्ट आख्यान सुनना
श्रीमहादेव जी बोले – मुनिश्रेष्ठ ! इस प्रकार छल-पूर्वक पृथ्वी का भार मिटाकर श्रीकृष्ण ने पृथ्वी तल से पुनः अपने
श्रीमहादेव जी बोले – जब पृथ्वी के भार का हरण करने के लिए महाकाली कृष्ण रूप से अपनी सेना को