पुरुषोत्तम सहस्त्रनाम स्तोत्रम्

इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें वेदरूपी कल्पवृक्ष के परिपक्व फल “निगमकल्पतरोर्गलितं फलं” अर्थात श्रीमद्भागवतमहापुराण के प्रथम स्कन्ध

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श्रावण मास माहात्म्य – उनत्तीसवाँ (29th) अध्याय

श्रावण मास में किये जाने वाले व्रतों का कालनिर्णय ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! अब मैं पूर्व में कहे

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श्रावण मास माहात्म्य – अट्ठाईसवाँ अध्याय

अगस्त्य जी को अर्घ्य प्रदान की विधि ईश्वर बोले – हे ब्रह्मपुत्र ! अब मैं अगस्त्य जी को अर्घ्य प्रदान

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श्रावण मास माहात्म्य – सत्ताईसवाँ अध्याय

कर्क संक्रांति और सिंह संक्रांति में किए जाने वाले कार्य ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! श्रावण मास में कर्क

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श्रावण मास माहात्म्य – छब्बीसवाँ अध्याय

श्रावण अमावस्या को किये जाने वाले वृष पूजन और कुश ग्रहण का विधान ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! श्रावण

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श्रावण मास माहात्म्य – चौबीसवाँ अध्याय

श्रीकृष्णजन्माष्टमी व्रत के माहात्म्य में राजा मितजित का आख्यान ईश्वर बोले – हे ब्रह्मपुत्र ! पूर्वकल्प में दैत्यों के भार

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