श्रीललिताष्टोत्तरशतनामावलि: 

ऊँ ऎं हृीं श्रीं  1) ऊँ ऎँ हृीं श्रीं रजताचलश्रृंगाग्रममध्यस्थायै नमो नम: 2) ऊँ ऎँ हृीं श्रीं हिमाचलमहावंशपावनायै नमो नम:

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श्री पार्वती चालीसा और आरती

श्री पार्वती चालीसा  ।।दोहा।। जय गिरि तनये दक्षजे शंभु प्रिये गुणखानि । गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवानि

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श्रीललितात्रिशतीस्तोत्ररत्ननामावलि: | Shri Lalita Trishati Stotra Ratna Namavali

अस्य श्रीललितात्रिशतीस्तोत्रमालामन्त्रस्य हयग्रीवऋषये नम: । (शिरसि) अनुष्टुपछन्द से नम: । (मुखे), श्रीललिताम्बादेवतायै नम: । हृदये, क. 5 बीजाय नम: ।

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पुरुषोत्तम सहस्त्रनाम स्तोत्रम्

इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें वेदरूपी कल्पवृक्ष के परिपक्व फल “निगमकल्पतरोर्गलितं फलं” अर्थात श्रीमद्भागवतमहापुराण के प्रथम स्कन्ध

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