श्रीललितात्रिशतीस्तोत्ररत्ननामावलि: | Shri Lalita Trishati Stotra Ratna Namavali

अस्य श्रीललितात्रिशतीस्तोत्रमालामन्त्रस्य हयग्रीवऋषये नम: । (शिरसि) अनुष्टुपछन्द से नम: । (मुखे), श्रीललिताम्बादेवतायै नम: । हृदये, क. 5 बीजाय नम: ।

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श्रीदत्तात्रेय वज्र कवच

श्रीगणेशाय नम: । श्रीदत्तात्रेय नम: ।। ऋषिय ऊचु: कथं संकल्पसिद्धि: स्याद्वेदव्यास कलौ युगे । धर्मार्थकाममोक्षाणां साधनं किमुदाहृतम् ।।1।। अर्थ ऋषियों

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पार्वती-मंगल

पार्वती-मंगल में श्रीतुलसीदास जी ने देवाधिदेव भगवान् शंकर के द्वारा जगदम्बा पार्वती के कल्याणमय पाणिग्रहण का काव्यरूप में रसमय चित्रण

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श्रावण मास माहात्म्य – उनत्तीसवाँ (29th) अध्याय

श्रावण मास में किये जाने वाले व्रतों का कालनिर्णय ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! अब मैं पूर्व में कहे

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श्रावण मास माहात्म्य – अट्ठाईसवाँ अध्याय

अगस्त्य जी को अर्घ्य प्रदान की विधि ईश्वर बोले – हे ब्रह्मपुत्र ! अब मैं अगस्त्य जी को अर्घ्य प्रदान

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श्रावण मास माहात्म्य – सत्ताईसवाँ अध्याय

कर्क संक्रांति और सिंह संक्रांति में किए जाने वाले कार्य ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! श्रावण मास में कर्क

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श्रावण मास माहात्म्य – छब्बीसवाँ अध्याय

श्रावण अमावस्या को किये जाने वाले वृष पूजन और कुश ग्रहण का विधान ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! श्रावण

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