महाभागवत – देवी पुराण – उनहत्तरवाँ अध्याय
श्रीमहादेव जी बोले – ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को महापापी जनों के भी उद्धार के लिए
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श्रीमहादेव जी बोले – ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को महापापी जनों के भी उद्धार के लिए
श्रीमहादेवजी बोले – महामुने ! इस प्रकार पुण्यात्मा राजा भगीरथ ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में हस्त नक्षत्र से युक्त
भगीरथ बोले – पार्वतीनाथ, देवदेव,परात्पर,अच्युत, अनघ, पञ्चास्य, भीमास्य, रुचिरानन, ओंकारस्वरूप आपको नमस्कार है। व्याघ्राजिनधर, अनन्त, पारावारविवर्जित, पञ्चानन, महासत्त्व, महाज्ञानमय, प्रभु
श्रीमहादेवजी बोले – मुनिश्रेष्ठ ! देववन्दित पितामह ब्रह्माजी ने भगवती गंगा को भगवान् विष्णु के चरणकमल में स्थित जानकर अपने
श्रीमहादेवजी बोले – विरोचन पुत्र धर्मात्मा दैत्यराज बलि ने देवराज इंद्र से त्रैलोक्य का राज्य छीन लिया। तब देवमाता अदिति
श्रीनारद जी बोले – परमेश्वर ! आपने कृपापूर्वक महापापनाशक, पुण्यप्रद, धन्य करने वाला और दिव्य आख्यान मुझे सुनाया। मैंने जैसा