भगवान नर-नारायण की कथा

भगवान विष्णु ने धर्म की पत्नी रुचि के माध्यम से नर और नारायण नाम के दो ऋषियों के रूप में अवतार लिया। वे जन्म से तपोमूर्ति थे अत: जन्म लेते ही बदरी वन में तपस्या करने के लिए चले गये। उनकी तपस्या से ही संसार में सुख और शान्ति का विस्तार होता है। बहुत से…

दशमहाविद्या – कमला

श्रीमद्भागवत के आठवें स्कन्ध के आठवें अध्याय में कमला के उद्भव की विस्तृत कथा आती है। देवताओं तथा असुरों के द्वारा अमृत प्राप्ति के उद्देश्य से किये गए सनुद्र-मंथन के फलस्वरुप इनका प्रादुर्भाव हुआ था। इन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में वरण किया था। महाविद्याओं में ये दसवें स्थान पर आती हैं। भगवती कमला…

दशमहाविद्या – मातंगी

मतंग शिव का नाम है, इनकी शक्ति मातंगी है। मातंगी के ध्यान में बताया गया है कि ये श्यामवर्णा हैं और चन्द्रमा को मस्तक पर धारण किये हुए हैं। भगवती मातंगी त्रिनेत्रा, रत्नमय सिंहासन पर आसीन, नीलकमल के समान कान्तिवाली तथा राक्षस-समूह रूप अरण्य को भस्म करने में दावानल के समान हैं। इन्होंने अपनी चार…

दशमहाविद्या – वगलामुखी

व्यष्टि रूप में शत्रुओं को नष्ट करने की इच्छा रखने वाली तथा समष्टि रूप में परमात्मा की संहार-शक्ति ही वगला है। पीताम्बरा विद्या के नाम से विख्यात वगलामुखी की साधना प्राय: शत्रु भय से मुक्ति और वाक्-सिद्धि के लिए की जाती है। इनकी उपासना में हरिद्रामाला, पीत-पुष्प एवं पीतवस्त्र का विधान है। महाविद्याओं में इनका…

श्री ललिता त्रिशती

ऊँ ककार रूपा कल्याणी कल्याण गुण शालिनी। कल्याण शैलनिलया कमनीया कलावती।।1।। कमलाक्षी कल्मषघ्नी करुणामृतसागरा। कदम्ब कानन आवासा कदम्बकुसुमप्रिया।।2।। कंदर्पविद्या कंदर्प जन कापांग वीक्षणा। कर्पूर वीटी सौरभ्य कल्लोलित कुकुब् तटा।।3।। कलिदोषहरा कंजलोचना कम्रविग्रहा। कर्मादि साक्षिणी कारयित्री कर्मफलप्रदा।।4।। एकाररूपा च एकाक्षरी एकानेकाक्षराकृति:। एतत् अदित्य निर्देश्या च एकानंद चित् आकृति:।।5।। एवम् इति आगम बोध्या चैकभक्तिमदर्चिता। एकाग्रचित्तनिर्ध्याता चैषणारहितादृता।।6।। एला…

दशमहाविद्या – त्रिपुरभैरवी

क्षीयमान विश्व के अधिष्ठान दक्षिणामूर्ति कालभैरव हैं और उनकी शक्ति ही त्रिपुरभैरवी है। ये ललिता या महात्रिपुरसुन्दरी की रथवाहिनी हैं। ब्रह्माण्ड पुराण में इन्हें गुप्त योगिनियों की अधिष्ठात्री देवी के रुप में चित्रित किया गया है। मत्स्यपुराण में इनके त्रिपुरभैरवी, कोलेशभैरवी, रुद्रभैरवी, चैतन्यभैरवी तथा नित्याभैरवी आदि रूपों का वर्णन प्राप्त होता है। इन्द्रियों पर विजय…

गरुड़ पुराण – पाँचवां अध्याय

गरुड़ उवाच गरुड़ जी ने कहा – हे केशव ! जिस-जिस पाप से जो-जो चिह्न प्राप्त होते हैं और जिन-जिन योनियों में जीव जाते हैं, वह मुझे बताइए।   श्रीभगवानुवाच श्रीभगवान ने कहा – नरक से आये हुए पापी जिन पापों के द्वारा जिस योनि में आते हैं और जिस पाप से जो चिह्न होता…

काशी-स्तुति

सेइत सहित सनेह देह भरि, कामधेनु कलि कासी। समनि सोक-संताप-पाप-रुज, सकल-सुमंगल-रासी।।1।। अर्थ – इस कलियुग में काशी रुपी कामधेनु का प्रेम सहित जीवन भर सेवन करना चाहिए. यह शोक, सन्ताप, पाप और रोग का नाश करने वाली तथा सब प्रकार के कल्याणों की खानि है.   मरजादा चहुँओर चरनबर, सेवत सुरपुर-बासी। तीरथ सब सुभ अंग…

भवानी स्तुति

दुसह दोष-दुख, दलनि, करु देवि दाया । विश्व-मूला-Sसि, जन-सानुकूलाSसि, कर शूलधारिणि महामूलमाया ।।1।।   तडित गर्भांड्ग सर्वांड्ग सुन्दर लसत, दिव्य पट भव्य भूषण विराजैं । बालमृग-मंजु खंजन-विलोचनि, चन्द्रवदनि लखि कोटि रतिमार लाजैं ।।2।।   रूप-सुख-शील-सीमाSसि, भीमाSसि, रामाSसि, वामाSसि वर बुद्धि बानी । छमुख-हेरंब-अंबासि, जगदंबिके, शंभु-जायासि जय जय भवानी ।।3।।   चंड-भुजदंड-खंडनि, बिहंडनि महिष मुंड-मद-भंग कर…

दशमहाविद्या – तारा

भगवती काली को ही नीलरुपा होने के कारण तारा भी कहा गया है. वचनान्तर से तारा नाम का रहस्य यह भी है कि ये सर्वदा मोक्ष देने वाली, तारने वाली हैं इसलिए इन्हें तारा भी कहा जाता है. महाविद्याओं में ये द्वितीय स्थान पर परिगणित हैं. अनायास ही वाकशक्ति प्रदान करने में समर्थ हैं इसलिए…

देवी षष्ठी की कथा

प्राचीन समय में प्रियव्रत नाम के एक बहुत प्रसिद्ध राजा हुए, इनके पिता का नाम स्वायम्भुव मनु था. प्रियव्रत योगीराज थे और इस कारण विवाह भी नहीं करना चाहते थे. तपस्या में इनकी विशेष रुचि थी लेकिन ब्रह्माजी की आज्ञा तथा सत्प्रयत्न के प्रभाव से उन्होंने विवाह कर लिया. विवाह के काफी वर्ष बीत जाने…

दशमहाविद्या – काली

दस महाविद्याओं में काली का प्रथम स्थान है. महाभागवत के अनुसार महाकाली ही मुख्य हैं और उनके उग्र तथा सौम्य दो रुपों में से ही अनेक रुप धारण करने वाली दस महाविद्याएँ हैं. भगवान शिव की शक्तियाँ ये महाविद्याएँ अनन्त सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं. माना जाता है कि महाकाली या काली ही समस्त…