राहु तथा केतु पर्वत

हथेली में इस पर्वत का क्षेत्र ठीक बीचों बीच, मस्तिष्क रेखा के नीचे, मंगल तथा शुक्र पर्वत के पास माना गया है। भाग्य रेखा इसी पर्वत से होकर शनि पर्वत तक जाती है। राहु का जो क्षेत्र माना गया है अगर वह अत्यन्त पुष्ट और उन्नत है तब ऎसा व्यक्ति निश्चित रूप से भाग्यवान होता…

शुक्र पर्वत अथवा शुक्र क्षेत्र

हाथ में अँगूठा की जड़ के नीचे का पूरा क्षेत्र जो आयु रेखा से घिरा हुआ रहता है वह शुक्र पर्वत कहलाता है। यूनान में शुक्र को “सुन्दरता की देवी” कहा गया है। जिन व्यक्तियों के हाथ में शुक्र पर्वत श्रेष्ठ स्तर का रहता है वह सुन्दर होने के साथ पूर्णतया सभ्य होते हैं। ऎसे…

मंगल क्षेत्र अथवा मंगल पर्वत

हथेली में मंगल के दो क्षेत्र पाए जाते हैं जो उन्नत मंगल (Positive Mars) और अवनत मंगल (Negetive Mars) के नाम से जाने जाते हैं। जीवन रेखा हथेली में जहाँ से शुरु होती है उसके नीचे का क्षेत्र तथा उससे घिरा हुआ शुक्र पर्वत के ठीक ऊपर फैले हुए भाग को मंगल क्षेत्र के कहते…

चन्द्र क्षेत्र अथवा चन्द्र पर्वत

वैसे तो चंद्रमा को पृथ्वी का उपग्रह माना जाता है लेकिन नवग्रहों में चंद्रमा को ग्रह के रुप में स्वीकारा गया है। चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे निकट होने से मनुष्य के मन पर गहरी छाप छोड़ता है। सही मायनों में इस ग्रह को सुन्दरता और कल्पना का कारक माना गया है। देखने में सुन्दर तथा…

बुध क्षेत्र अथवा बुध पर्वत

कनिष्ठिका अंगुली (Little Finger) अथवा हाथ की सबसे छोटी अंगुली की जड़ के नीचे वाले भाग को बुध क्षेत्र अथवा बुध पर्वत के नाम से जाना जाता है। इस पर्वत को भौतिक संपदा तथा भौतिक समृद्धि का सूचक माना जाता है। यही कारण है कि वर्तमान युग में इसका महत्व जरुरत से ज्यादा माना जाता…

सूर्य क्षेत्र अथवा सूर्य पर्वत

हथेली में अनामिका अंगुली (Ring Finger) की जड़ अथवा मूल स्थान के नीचे के क्षेत्र को सूर्य पर्वत अथवा सूर्य क्षेत्र कहा गया है, यह हृदय रेखा के ऊपर की ओर स्थित रहता है। इस सूर्य पर्वत से व्यक्ति की सफलता अथवा असफलताएँ देखी जाती हैं, यह पर्वत किसी भी व्यक्ति की सफलता का सूचक…

शनि पर्वत अथवा शनि क्षेत्र

इस पर्वत का आधार मध्यमा अंगुली (Middle Finger) के मूल में होता है अर्थात मध्यमा अंगुली का आरंभ हथेली के जिस स्थान से होता है उस स्थान को शनि क्षेत्र अथवा शनि पर्वत कहा जाता है। हथेली में इस पर्वत के विकास को असाधारण प्रवृत्तियों का सूचक माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति के हाथ…

हाथ में बृहस्पति क्षेत्र अथवा गुरु पर्वत

गुरु क्षेत्र(Mount Of Jupiter) का स्थान हाथ में तर्जनी अंगुली (First Finger) के मूल (Base) में अर्थात हाथ की जो सबसे पहली अंगुली है उसके ठीक नीचे और मंगल पर्वत के ऊपर होता है। इस पर्वत अथवा गुरु क्षेत्र से अधिकार, नेतृत्व, संचालन तथा लेखन मुख्य रुप से देखा जाता है। यह पर्वत इन बातों…

दोहरी मस्तिष्क रेखा

हाथ में दोहरी मस्तिष्क रेखा कम ही पाई जाती है. जब जब दो अलग-अलग मस्तिष्क रेखाएँ स्पष्ट रुप से दिखाई दें तो उसके प्रभाव से जातक दो स्वभावों का हो जाता है. व्यक्ति की मानसिक प्रवृत्तियाँ दो अलग प्रवाहों में बहती हैं. व्यक्ति में मानसिक कार्य करने की असाधारण व अद्भुत मानसिक क्षमता होती है….

मस्तिष्क रेखा में परिवर्तन

मस्तिष्क रेखा प्राय: अपने मार्ग में अनेकों प्रकार के परिवर्तन करती है और उसमें से रेखाएँ निकलकर ऊपर या नीचे की ओर जाती हैं. इन परिवर्तनों से भी मस्तिष्क रेखा के प्रभाव के संबंध में महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त होती है. उदाहरण के लिए यदि एक नीचे की ओर मुड़ती रेखा अपने मार्ग में किसी स्थान…

मस्तिष्क रेखा से जुड़े तथ्य

मस्तिष्क रेखा पर द्वीप चिन्हों का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है लेकिन इनका विचार करने पर यह ध्यान देना आवश्यक है कि किस आयु में किस चिन्ह का क्या प्रभाव पड़ने वाला है. वर्तमान समय में यदि द्वीप चिन्ह बना है तो यह हर रेखा को कमजोर बनाता है. द्वीप को दुर्भाग्य सूचक माना गया है….

मस्तिष्क रेखा का आरंभ स्थान

इस लेख में हम पाठकों को मस्तिष्क रेखा के आरंभ स्थान के बारे में  बताएंगे. मस्तिष्क रेखा हाथ में तीन प्रकार से आरंभ होती है. पहली प्रकार की मस्तिष्क रेखा का आरंभ जीवन रेखा के अंदर से होता है. दूसरी प्रकार की मस्तिष्क रेखा का आरंभ जीवन रेखा से जुड़कर होता है और तीसरी प्रकार…