अथ मूर्त्तिरहस्यम्

देवी की अंगभूता छ्: देवियाँ हैं – नन्दा, रक्तदन्तिका, शाकम्भरी, दुर्गा, भीमा और भ्रामरी. ये देवियों की साक्षात मूर्तियाँ हैं,

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श्रीदुर्गामानस पूजा

उद्यच्चन्दनकुंकुमारुणपयोधाराभिराप्लावितां  नानानर्घ्यमणिप्रवालघटितां दत्तां गृहाणाम्बिके । आमृष्टां सुरसुन्दरीभिरभितो हस्ताम्बुजैर्भक्तितो मात: सुन्दरि भक्तकल्पलतिके श्रीपादुकामादरात् ।।1।।   अर्थ – माता त्रिपुरसुन्दरि ! तुम

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अथ वेदोक्तं रात्रिसूक्तम्

ऊँ रात्रीत्याद्यष्टर्चस्य सूक्तस्य कुशिक: सौभरो रात्रिर्वा भारद्वाजो ऋषि:, रात्रिर्देवता, गायत्री छन्द:, देवीमाहात्म्यपाठे विनियोग: । ऊँ रात्री व्यख्यदायती पुरुत्रा देव्यक्षभि: ।

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अथ कीलकम्

ऊँ अस्य श्रीकीलकमन्त्रस्य शिव ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, श्रीमहासरस्वती देवता, श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थं सप्तशतीपाठांगत्वेन जपे विनियोग: ।   ऊँ नमश्चण्डिकायै ।।   मार्कण्डेय

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भैरव स्तोत्र

ॐ महाकाल भैरवाय नम: जलद् पटलनीलं दीप्यमानोग्रकेशं, त्रिशिख डमरूहस्तं चन्द्रलेखावतंसं! विमल वृष निरुढं चित्रशार्दूलवास:, विजयमनिशमीडे विक्रमोद्दण्डचण्डम्!!   सबल बल विघातं

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