माघ माहात्म्य – बाईसवाँ अध्याय

इतना कहकर भगवान अन्तर्ध्यान हो गए तब देवनिधि कहने लगे हे महर्षि! जैसे गंगाजी में स्नान करने से मनुष्य पवित्र हो जाता है वैसे ही भगवान की इस कथा को सुनकर मैं पवित्र हो गया. कृपा करके उस स्तोत्र को कहिए जिससे उस ब्राह्मण ने भगवान को प्रसन्न किया. लोमशजी कहते हैं कि उस स्तोत्र…

माघ माहात्म्य – इक्कीसवाँ अध्याय

लोमश जी कहने लगे कि पूर्व काल में अवंती देश में वीरसैन नाम का राजा था. उसने नर्मदा के किनारे राजसूय यज्ञ किया और अश्वमेघ यज्ञ भी किए जिनके खम्भे सोने के बनाए गए. ब्राह्मणों को अन्न का बहुत-सा दान किया और बहुत-सी गाय, सुंदर वस्त्र और सोने के आभूषण दान में दिए. वह देवताओं…

माघ माहात्म्य – बीसवाँ अध्याय

वेदनिधि कहने लगे कि हे महर्षि! धर्म को जल्दी ही कहिए क्योंकि श्राप की अग्नि बड़ी दुखकारक होती है. लोमश ऋशि कहने लगे कि यह सब मेरे साथ नियमपूर्वक माघ स्नान करें. अंत में यह श्राप से छूट जाएंगे. मेरा यह निश्चय है शुभ तीर्थ में माघ स्नान करने से शाप का फल नष्ट हो…

माघ माहात्म्य – उन्नीसवाँ अध्याय

वह पाँचों कन्याएँ इस प्रकार विलाप करती हुई बहुत देर प्रतीक्षा करके अपने घर लौटी. जब घर में आईं तो माताओं ने कहा कि इतना विलम्ब तुमने क्यों कर दिया तब कन्याओं ने कहा कि हम किन्नरियों के साथ क्रीड़ा करती हुई सरोवर पर थी और कहने लगी कि आज हम थक गई हैं और…

व्रत व त्यौहार नवंबर 2017

  तिथि(Dates) दिन(Days) त्यौहार(Festivals) 23 नवंबर बृहस्पतिवार नाग पंचमी, श्री पंचमी – श्री लक्ष्मी पंचमी, श्री राम विवाहोत्सव 24 नवंबर शुक्रवार स्कन्द(गुह) षष्ठी, चम्पा षष्ठी(महाराष्ट्र) 25 नवंबर शनिवार पंचक प्रारंभ 26:01 से, मित्र सप्तमी, विष्णु सप्तमी 27 नवंबर सोमवार श्रीदुर्गाष्टमी 28 नवंबर मंगलवार नन्दा नवमी 30 नवंबर बृहस्पतिवार पंचक समाप्त 16:13, मोक्षदा एकादशी व्रत, श्री…

माघ माहात्म्य – अठारहवाँ अध्याय

श्री वशिष्ठ ऋषि कहने लगे कि हे राजन! मैंने दत्तात्रेयजी द्वारा कहा माघ मास माहात्म्य कहा, अब माघ मास के स्नान का फल सुनो. हे परंतप! माघ स्नान सब यज्ञों, व्रतों का और तपों का फल देने वाला है. माघ मास में स्नान करने वाले स्वयं तो स्वर्ग में जाते ही हैं उनके माता और…

माघ माहात्म्य – सत्रहवाँ अध्याय

अप्सरा कहने लगी कि हे रा़क्षस! वह ब्राह्मण कहने लगा कि इंद्र इस प्रकार अपनी अमरावती पुरी को गया. सो हे कल्याणी! तुम भी देवताओं से सेवा किए जाने वाले प्रयाग में माघ मास में स्नान करने से निष्पाप होकर स्वर्ग में जाओगी, सो मैंने उस ब्राह्मण के यह वचन सुनकर उसके पैरों में पड़कर…

माघ माहात्म्य – सोलहवाँ अध्याय

कार्तवीर्य कहने लगा कि हे भगवान! वह राक्षस कौन था? और कांचन मालिनी कौन थी? उसने अपना धर्म कैसे दिया और उनका साथ कैसे हुआ. हे ऋषि! अत्रि ऋषि की संतानों के सूर्य! यह कथा सुनाकर मेरा कौतूहल दूर कीजिए तब दत्तात्रेयजी कहने लगे कि राजन इस पुरातन विचित्र इतिहास को सुनो – कांचन मालिनी…

माघ माहात्म्य – पंद्रहवाँ अध्याय

दत्तात्रेयजी कहने लगे कि हे राजन! प्रजापति ने पापों के नाश के लिए प्रयाग तीर्थ की रचना की. सफेद (गंगाजी) और काली(यमुनाजी) के जल की धारा में स्नान का माहात्म्य भली प्रकार सुनो. जो इस संगम में माघ मास में स्नान करता है वह गर्भ योनि में नहीं आता. भगवान विष्णु की दुर्गम माया माघ…

माघ माहात्म्य – चौदहवाँ अध्याय

कार्तवीर्य जी बोले कि हे विप्र श्रेष्ठ! किस प्रकार एक वैश्य माघ स्नान के पुण्य से पापों से मुक्त होकर दूसरे के साथ स्वर्ग को गया सो मुझसे कहिए तब दत्तात्रेय जी कहने लगे कि जल स्वभाव से ही उज्जवल, निर्मल, शुद्ध, मलनाशक और पापों को धोने वाला है. जल सब प्राणियों का पोषण करने…

माघ माहात्म्य – तेरहवाँ अध्याय

विकुंडल कहने लगा कि तुम्हारे वचनों से मेरा चित्त अति प्रसन्न हुआ है क्योंकि सज्जनों के वचन सदैव गंगाजल के सदृश पापों का नाश करने वाले होते हैं. उपकार करना तथा मीठा बोलना सज्जनों का स्वभाव ही होता है. जैसे अमृत मंडल चंद्रमा को भी ठंडा कर देता है. अब कृपा करके यह भी बतलाइए…

माघ माहात्म्य – बारहवाँ अध्याय

यमदूत कहने लगा कि जो कोई प्रसंगवश भी एकादशी के व्रत को करता है वह दुखों को प्राप्त नहीं होता. मास की दोनों एकादशी भगवान पद्मनाभ के दिन हैं. जब तक मनुष्य इन दिनों में व्रत नहीं करता उसके शरीर में पाप बने रहते हैं. हजारों अश्वमेघ, सैकड़ो वाजपेयी यज्ञ, एकादशी व्रत की सोलहवीं कला…