मांगलिक योग और निवारण

मांगलिक योग को लेकर बहुत सी भ्राँतियाँ समाज में ज्योतिषियों द्वारा फैलाई जा रही है या यूँ कहिए कि सोशल मीडिया पर आधी-अधूरी जानकारी मांगलिक योग को लेकर भी दी जा रही है या फिर कोई व्यक्ति मांगलिक योग को लेकर कुछ लिखता भी है तो उसकी जाँच परख करने की बजाय दूसरा व्यक्ति उसे…

श्री रामचन्द्र जी के 108 नाम

1) ऊँ श्री राजीव लोचनाय नम: 2) ऊँ श्री रामाया नम: 3) ऊँ श्री रामभद्राय नम: 4) ऊँ श्री राजेन्द्राय नम: 5) ऊँ श्री जानकी पतये नम: 6) ऊँ श्री परमेश्वराय नम: 7) ऊँ श्री जनार्दनाय नम: 8) ऊँ श्री शत्रुजिते नम: 9) ऊँ श्री सर्वज्ञाय नम: 10) ऊँ श्री बालिमर्दनाय नम: 11) ऊँ श्री…

भगवत्स्तुति:

भीष्म उवाच – Bhishma Uvach इति  मतिरुपकल्पिता वितृष्णा भगवति सात्वतपुंगवे विभूम्नि । स्वसुखमुपगते क्वचिद्विहर्तुं   प्रकृतिमुपेयुषि   यद्भवप्रवाह: ।।1।।   त्रिभुवनकमनं तमालवर्णं     रविकरगौरवराम्बरं      दधाने । वपुरलककुलावृताननाब्जं    विजयसखे  रतिरस्तु मेSनवद्या ।।2।।   युधि  तुरगरजोविधूम्रविष्वक्-कचलुलितश्रमवार्यलड्कृतास्ये । मम निशितशरैर्विभिद्यमान-त्वचि विलसत्कवचेSस्तु कृष्ण आत्मा।।3।।   सपदि  सखिवचो  निशम्य  मध्ये निजपरयोर्बलयो  रथं  निवेश्य । स्थितवति  परसैनिकायुरक्ष्णा  हृतवति  पार्थसखे  रतिर्ममास्तु ।।4।।   व्यवहितपृतनामुखं  निरीक्ष्य…

आनन्दलहरी

भवानि स्तोतुं त्वां प्रभवति चतुर्भिनं वदनै: प्रजानामीशानस्त्रिपुरमथन: पंचभिरपि। न  षड्भि: सेनानीर्दशशतमुखैरप्यहिपति- स्तदान्येषां केषां कथय कथमस्मिन्नवसर:।।1।।   घृतक्षीरद्राक्षामधुमधुरिमा कैरपि       पदै- र्विशिष्यानाख्येयो भवति रसनामात्रविषय:। तथा ते सौन्दर्य परमशिवदृड्मात्रविषय: कथकांरं     ब्रूम:    सकलनिगमागोचरगुणे।।2।।   मुखे   ते   ताम्बूलं   नयनयुगले   कज्जलकला ललाटे काश्मीरं विलसति गले मौक्तिकलता। स्फुरत्कांची  शाटी  पृथुकटितटे  हाटकमयी भजामि त्वां गौरीं नगपतिकिशोरीमविरतम् ।।3।।   विराजन्मन्दारद्रुमकुसुमहारस्तनतटी नदद्वीणानादश्रवणविलसत्कुण्डलगुणा। नतांगी  मातंगीरुचिरगतिभंगी  भगवती…

शनि सहस्त्रनाम स्तोत्र

जब कभी शनि की दशा/अन्तर्दशा में अकारण चिन्ताएँ होने लगे अथवा कार्य बाधा होने लगे तब श्रद्धा तथा विश्वास के साथ शनि सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए इसलिए शनि पीड़ा शांत होगी. शनि सहस्त्रनाम का अर्थ है – शनि देव के हजार नाम. शनि के एक हजार नामों का श्लोकबद्ध वर्णन किया गया है. जो…

दशरथकृत शनि स्तवन

  शनि की पीड़ा से मुक्ति के अकसर लिए दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करने का परामर्श दिया जाता है. यदि इस शनि स्तोत्र के साथ दशरथकृत शनि स्तवन का पाठ भी किया जाए तो अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है. यहाँ स्तवन का तात्पर्य – अत्यन्त विनम्र भाव से पूरी तरह समर्पित होकर शनि देव…

श्रीशनि व शनिभार्या स्तोत्र

  श्रीशनि एवं शनिभार्या स्तोत्र एक दुर्लभ पाठ माना गया है, शनि के अन्य स्तोत्रों के साथ यदि इस दुर्लभ स्तोत्र का पाठ भी किया जाए तो खोया हुआ साम्राज्य भी पुन: प्राप्त किया जा सकता है. राजा नल ने इस श्रीशनि एवं शनिभार्या स्तोत्र का नियमित रुप से पाठ किया और अपना छीना हुआ…

शनि कवच

शनि ग्रह की पीड़ा से बचने के लिए अनेकानेक मंत्र जाप, पाठ आदि शास्त्रों में दिए गए हैं. शनि ग्रह के मंत्र भी कई प्रकार हैं और कवच का उल्लेख भी मिलता है. युद्ध क्षेत्र में जाने से पूर्व सिपाही अपने शरीर पर एक लोहे का कवच धारण करता था ताकि दुश्मनों के वार से…

श्रीशनि वज्रपंजर कवच

आधुनिक समय में हर व्यक्ति शनि के नाम से भयभीत रहता है. इसका कारण शनि के विषय में फैली गलत भ्राँतियाँ भी हैं. शनि ग्रह किसी व्यक्ति को कैसे फल देगा, ये जन्म कुंडली में शनि की स्थिति तथा योगों पर निर्भर करता है. कई बार योगकारी होते भी अपनी दशा/अन्तर्दशा में शनि पूरे फल…

देवीस्तुति:

देवीस्तुति में देवी की स्तुति की गई है अर्थात उनकी वंदना की गई है. उनके अनेको रुपों को बारम्बार नमस्कार किया गया है.  इस देवीस्तुति का नित्य पाठ करने से व्यक्ति पर महादेवी की कृपा सदा बनी रहती है, वैसे भी माँ अपने भक्त की पुकार सुनकर शीघ्र ही पिघल जाती है. ध्यानम् – Dhyanam…

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और व्यवसाय

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का विस्तार कुंभ राशि में 20 अंश से आरंभ होकर मीन राशि में 3 अंश 20 कला तक रहता है. इस नक्षत्र कके अन्तर्गत निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं :- इस नक्षत्र में दाह संस्कार अथवा मृत्यु व मृतक संस्कार से जुड़े सारे लोग आते हैं जैसे कफन बेचने तथा बनाने वाले, शव वाहन…

अभिजित नक्षत्र और व्यवसाय

अभिजित नक्षत्र का विस्तार मकर राशि में 6 अंश 40 कला से लेकर 10 अंश(Degree) 53 कला(Minute) 20 विकला(Second) तक माना गया है. इस नक्षत्र के अन्तर्गत आने वाले व्यवसाय निम्नलिखित हैं :- भूमि खोदकर नहर, तालाब अथवा नल कूप बनाने का काम इस नक्षत्र के अंदर आता है. धातु उत्खनन, वित्त व्यवस्था, वित्त पोषण…