मंगल क्षेत्र अथवा मंगल पर्वत

हथेली में मंगल के दो क्षेत्र पाए जाते हैं जो उन्नत मंगल (Positive Mars) और अवनत मंगल (Negetive Mars) के नाम से जाने जाते हैं। जीवन रेखा हथेली में जहाँ से शुरु होती है उसके नीचे का क्षेत्र तथा उससे घिरा हुआ शुक्र पर्वत के ठीक ऊपर फैले हुए भाग को मंगल क्षेत्र के कहते…

चन्द्र क्षेत्र अथवा चन्द्र पर्वत

वैसे तो चंद्रमा को पृथ्वी का उपग्रह माना जाता है लेकिन नवग्रहों में चंद्रमा को ग्रह के रुप में स्वीकारा गया है। चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे निकट होने से मनुष्य के मन पर गहरी छाप छोड़ता है। सही मायनों में इस ग्रह को सुन्दरता और कल्पना का कारक माना गया है। देखने में सुन्दर तथा…

चंद्रमा

जन्म कुंडली में चंद्रमा सबसे ज्यादा सौम्य ग्रह माना जाता है और कुंडली के अनुसार मन का कारक ग्रह है। सभी ग्रहों को देवता रुप में पूजा जाता है इसलिए चंद्रमा को भी देवता माना गया है। चंद्र देव का वर्ण गोरा है और इनके वस्त्र, अश्व तथा रथ तीनों ही श्वेत वर्ण के हैं।…

बुध क्षेत्र अथवा बुध पर्वत

कनिष्ठिका अंगुली (Little Finger) अथवा हाथ की सबसे छोटी अंगुली की जड़ के नीचे वाले भाग को बुध क्षेत्र अथवा बुध पर्वत के नाम से जाना जाता है। इस पर्वत को भौतिक संपदा तथा भौतिक समृद्धि का सूचक माना जाता है। यही कारण है कि वर्तमान युग में इसका महत्व जरुरत से ज्यादा माना जाता…

सूर्य क्षेत्र अथवा सूर्य पर्वत

हथेली में अनामिका अंगुली (Ring Finger) की जड़ अथवा मूल स्थान के नीचे के क्षेत्र को सूर्य पर्वत अथवा सूर्य क्षेत्र कहा गया है, यह हृदय रेखा के ऊपर की ओर स्थित रहता है। इस सूर्य पर्वत से व्यक्ति की सफलता अथवा असफलताएँ देखी जाती हैं, यह पर्वत किसी भी व्यक्ति की सफलता का सूचक…

शनि पर्वत अथवा शनि क्षेत्र

इस पर्वत का आधार मध्यमा अंगुली (Middle Finger) के मूल में होता है अर्थात मध्यमा अंगुली का आरंभ हथेली के जिस स्थान से होता है उस स्थान को शनि क्षेत्र अथवा शनि पर्वत कहा जाता है। हथेली में इस पर्वत के विकास को असाधारण प्रवृत्तियों का सूचक माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति के हाथ…

हाथ में बृहस्पति क्षेत्र अथवा गुरु पर्वत

गुरु क्षेत्र(Mount Of Jupiter) का स्थान हाथ में तर्जनी अंगुली (First Finger) के मूल (Base) में अर्थात हाथ की जो सबसे पहली अंगुली है उसके ठीक नीचे और मंगल पर्वत के ऊपर होता है। इस पर्वत अथवा गुरु क्षेत्र से अधिकार, नेतृत्व, संचालन तथा लेखन मुख्य रुप से देखा जाता है। यह पर्वत इन बातों…

वैशाख मास की अंतिम तीन तिथियों का महत्व

श्रुतदेव जी कहते हैं – राजेन्द्र ! वैशाख के शुक्ल पक्ष में जो अन्तिम तीन तिथियाँ, त्रयोादशी से पूर्णिमा तक, हैं वे बड़ी पवित्र और शुभ कारक हैं। उनका नाम “पुष्करिणी” हैं, वे सब पापों का क्षय करने वाली हैं। जो संपूर्ण वैशाख मास में स्नान करने में असमर्थ हैं, वह यदि इन तीन तिथियों…

वैशाख की अक्षय तृतीया और द्वादशी की महत्ता

श्रुतदेव जी कहते हैं – जो मनुष्य अक्षय तृतीया को सूर्योदय काल में प्रात: स्नान करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करके कथा सुनते हैं वे मोक्ष के भागी होते हैं। जो उस दिन श्रीमधुसूदन की प्रसन्नता के लिए दान करते हैं, उनका वह पुण्यकर्म भगवान की आज्ञा से अक्षय फल देता है। वैशाख…

वैशाख माहात्म्य – स्कन्द पुराण

वैशाख मास की श्रेष्ठता नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तम् । देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ।। अर्थ – भगवान नारायण, नरश्रेष्ठ नर, देवी सरस्वती तथा महर्षि वेदव्यास को नमस्कार करके भगवान की विजय-कथा से परिपूर्ण इतिहास-पुराण आदि का पाठ करना चाहिए।   सूतजी कहते हैं – राजा अम्बरीष ने परमेष्ठी ब्रह्मा के पुत्र देवर्षि नारद…

वैशाख-माहात्म्य प्रसंग में राजा महीरथ की कथा

यमराज कहते हैं – ब्रह्मन् ! पूर्वकाल की बात है, महीरथ नाम से विख्यात एक राजा थे। उन्हें अपने पूर्वजन्म के  पुण्यों के फलस्वरुप प्रचुर ऎश्वर्य और सम्पत्ति प्राप्त हुई थी परन्तु राजा राज्यलक्ष्मी का सारा भार मन्त्री पर रखकर स्वयं विषयभोग में आसक्त हो रहे थे। वे न प्रजा की ओर दृष्टि डालते थे…

तुलसीदल और अश्वत्थ(पीपल वृक्ष) की महिमा

ब्राह्मण ने पूछा – धर्मराज ! वैशाख मास में प्रात:काल स्नान करके एकाग्रचित्त हुआ पुरुष भगवान माधव का पूजन किस प्रकार करें? आप इसकी विधि का वर्णन करें। धर्मराज ने कहा – ब्रह्मन् ! पत्तों की जितनी जातियाँ हैं, उन सबमें तुलसी, भगवान श्रीविष्णु को अधिक प्रिय है। पुष्कर आदि जितने तीर्थ हैं, गंगा आदि…