महाभागवत – देवीपुराण – दूसरा अध्याय 

इस अध्याय में महामुनि जैमिनि द्वारा श्रीवेदव्यास जी से शिव-नारद-संवाद के रूप में वर्णित देवी के माहात्म्य वाले महाभागवत को

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अथ प्राधानिकं रहस्यम्

ऊँ अस्य श्रीसप्तशतीरहस्यत्रस्य नारायण ऋषिरनुष्टुप्छन्द:, महाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवता यथोक्तफलावाप्तयर्थं जपे विनियोग: । अर्थ – ऊँ सप्तशती के इन तीनों रहस्यों के

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श्रीललितात्रिशतीस्तोत्ररत्नप्रारम्भ:

सकुंकुमविलेपनामलिकचुम्बिकस्तूरिकां  समन्दहसितेक्षणां सशरचापपाशांकुशाम् । अशेषजनमोहिनीमरुणमाल्यभूषाम्बरां  जपाकुसुमभासुरां जपविधौ स्मरेदम्बिकाम् ।।   अगस्त्य उवाच  हयग्रीव दयासिन्धो भगवन् भक्तवत्सल । त्वत्त: श्रुतमशेषेण श्रोतव्यं

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