महाभागवत – देवीपुराण – पंद्रहवाँ अध्याय
इस अध्याय में हिमालय और मेना की तपस्या से प्रसन्न हो आद्यशक्ति का “पार्वती” नाम से हिमालय के यहाँ प्रकट
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इस अध्याय में हिमालय और मेना की तपस्या से प्रसन्न हो आद्यशक्ति का “पार्वती” नाम से हिमालय के यहाँ प्रकट
इस अध्याय में ब्रह्माजी का गंगा जी को कमण्डलु में लेकर स्वर्ग में आना है, माता से मिले बिना गंगा
इस अध्याय में भगवती सती तथा भगवान शिव का आनन्द विहार, दक्ष द्वारा यज्ञ करने और उसमें शंकर को न
इस अध्याय में महामुनि जैमिनि द्वारा श्रीवेदव्यास जी से शिव-नारद-संवाद के रूप में वर्णित देवी के माहात्म्य वाले महाभागवत को
श्रीगणेश जी को नमस्कार है।। श्रीगणेश जी के चरण कमल के परागकण, जो देवेन्द्र के मस्तक पर विराजमान मन्दार-पुष्प के
ऊँ अस्य श्रीसप्तशतीरहस्यत्रस्य नारायण ऋषिरनुष्टुप्छन्द:, महाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवता यथोक्तफलावाप्तयर्थं जपे विनियोग: । अर्थ – ऊँ सप्तशती के इन तीनों रहस्यों के