लक्ष्मीस्तोत्रम्
इन्द्र उवाच ऊँ नम: कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नम: । कृष्णप्रियायै सारायै पद्मायै च नमो नम: ।।1।। अर्थ – देवराज इन्द्र
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इन्द्र उवाच ऊँ नम: कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नम: । कृष्णप्रियायै सारायै पद्मायै च नमो नम: ।।1।। अर्थ – देवराज इन्द्र
अमोघ शिवकवच परम हितकारी है और सारे डरों को दूर करने वाला है. इसके प्रभाव से मृत्यु के नजदीक पहुँचा
सकुंकुमविलेपनामलिकचुम्बिकस्तूरिकां समन्दहसितेक्षणां सशरचापपाशांकुशाम् । अशेषजनमोहिनीमरुणमाल्यभूषाम्बरां जपाकुसुमभासुरां जपविधौ स्मरेदम्बिकाम् ।। अगस्त्य उवाच हयग्रीव दयासिन्धो भगवन् भक्तवत्सल । त्वत्त: श्रुतमशेषेण श्रोतव्यं
ऋषि रुवाच ऊँ त्रिगुणा तामसी देवी सात्त्विकी या त्रिधोदिता । सा शर्वा चण्डिका दुर्गा भद्रा भगवतीर्यते ।।1।। अर्थ – ऋषि
देवी की अंगभूता छ्: देवियाँ हैं – नन्दा, रक्तदन्तिका, शाकम्भरी, दुर्गा, भीमा और भ्रामरी. ये देवियों की साक्षात मूर्तियाँ हैं,
उद्यच्चन्दनकुंकुमारुणपयोधाराभिराप्लावितां नानानर्घ्यमणिप्रवालघटितां दत्तां गृहाणाम्बिके । आमृष्टां सुरसुन्दरीभिरभितो हस्ताम्बुजैर्भक्तितो मात: सुन्दरि भक्तकल्पलतिके श्रीपादुकामादरात् ।।1।। अर्थ – माता त्रिपुरसुन्दरि ! तुम