प्रदोषस्तोत्रम्

जय देव जगन्नाथ जय शंकर शाश्वत । जय सर्वसुराध्यक्ष जय सर्वसुरार्चित ।।1।। जय सर्वगुणातीत जय सर्ववरप्रद । जय नित्यनिराधार जय

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देवीस्तोत्रम्

श्रीभगवानुवाच नमो देव्यै प्रकृत्यै च विधात्र्यै सततं नम:। कल्याण्यै कामदायै च वृद्धयै सिद्धयै नमो नम:।।1।।   सच्चिदानन्दरूपिण्यै संसारारणयै नम:। पंचकृत्यविधात्र्यै

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दशमयीबालात्रिपुरसुन्दरीस्तोत्रम्

दशमयीबालात्रिपुरसुन्दरीस्तोत्रम् श्रीकाली बगलामुखी च ललिता धूम्रावती भैरवी मातंगी भुवनेश्वरी च कमला श्रीवज्रवैरोचनी। तारा पूर्वमहापदेन कथिता विद्या स्वयं शम्भुना लीलारूपमयी च

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स्वधा स्तोत्रम्

ब्रह्मोवाच – Brahmovach स्वधोच्चारणमात्रेण तीर्थस्नायी भवेन्नर:। मुच्यते सर्वपापेभ्यो वाजपेयफलं लभेत्।।1।। अर्थ – ब्रह्मा जी बोले – ‘स्वधा’ शब्द के उच्चारण

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श्रीसरस्वती स्तोत्रम्

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा।।1।।   आशासु

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नीलसरस्वती स्तोत्रम्

घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयंकरि। भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।1।। ऊँ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते। जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।2।। जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि।

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सूर्य द्वादशनाम स्तोत्र

आदित्यं प्रथमं नाम द्वितीयं तु दिवाकर:। तृतीयं भास्कर: प्रोक्तं चतुर्थं तु प्रभाकर:।।1।।   पंचमं तु सहस्त्रांशु षष्ठं त्रैलोक्यलोचन:। सप्तमं हरिदश्वश्य

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शिवप्रात:स्मरणस्तोत्रम्

प्रात: स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं गंगाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम्। खट्वांगशूलवरदाभयहसतमीशं   संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्।।1।।   प्रातर्नमामि गिरिशं गिरिजार्द्धदेहं सर्गस्थितिप्रलयकारनमादिदेवम्। विश्वेश्वरं विजितविश्वमनोSभिरामं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्।।2।।   प्रातर्भजामि शिवमेकमनन्तमाद्यं वेदान्तवेद्यमनघं

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गंगा दशहरा स्तोत्रम्

ऊँ  नम:  शिवायै  गंगायै  शिवदायै  नमो नम:। नमस्ते विष्णुरूपिण्यै ब्रह्ममूर्त्यै नमोSस्तु ते।।1।। नमस्ते   रुद्ररूपिण्यै   शांकर्यै   ते  नमो  नम:। सर्वदेवस्वरूपिण्यै      नमो

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