श्री मयूरेशस्तोत्रम्
यदि कोई व्यक्ति मानसिक अथवा शारीरिक रूप से परेशान है. किसी प्रकार की बीमारी से दुखी है तब इस स्तोत्र
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यदि कोई व्यक्ति मानसिक अथवा शारीरिक रूप से परेशान है. किसी प्रकार की बीमारी से दुखी है तब इस स्तोत्र
इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें वेदरूपी कल्पवृक्ष के परिपक्व फल “निगमकल्पतरोर्गलितं फलं” अर्थात श्रीमद्भागवतमहापुराण के प्रथम स्कन्ध
जटाधरं पाण्डुरंगं शूलहस्तं कृपानिधिम् । सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ।। अर्थ पीले वर्ण की आकृति वाले, जटा धारण किए हुए,
ऊँ श्रीरामो रामचन्द्रश्च रामभद्रश्च शाश्वत:। राजीवलोचन: श्रीमान् राजेन्द्रो रघुपुंगव: ।। जानकीवल्लभो जैत्रो जितामित्रो जनार्दन:। विश्वामित्रप्रियो दान्त: शरण्यत्राणतत्पर:।। वालिप्रमथनो वाग्मी सत्यवाक्
नमस्ते शरण्ये शिवे सानुकम्पे नमस्ते जगद्व्यापिकेविश्वरूपे। नमस्ते जगद्वन्द्यपादारविन्दे नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे।।1।। नमस्ते जगच्चिन्त्यमानस्वरूपे नमस्ते महायोगिनि ज्ञानरूपे। नमस्ते नमस्ते सदानन्दूपे
महेन्द्र उवाच नमो देव्यै महादेव्यै सुरभ्यै च नमो नम:। गवां बीजस्वरूपायै नमस्ते जगदम्बिके।।1।। नमो राधाप्रियायै च पद्मांशायै नमो नम:। नम: