महा भागवत – देवी पुराण – पैंतालीसवाँ अध्याय
श्रीमहादेव जी बोले – सुरश्रेष्ठ ब्रह्माजी बिल्ववृक्ष की छाया में भगवती जगदंबिका का असमय में भी भक्तिपूर्वक पूजन करके और
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श्रीमहादेव जी बोले – सुरश्रेष्ठ ब्रह्माजी बिल्ववृक्ष की छाया में भगवती जगदंबिका का असमय में भी भक्तिपूर्वक पूजन करके और
श्रीराम जी बोले – त्रिलोकवंदनिया ! युद्ध में विजय देनेवाली ! कात्यायनी ! आपको बार-बार नमस्कार है। मुझ पर प्रसन्न
श्रीमहादेवजी बोले – महामुने ! ब्रह्माजी के मुख से इस प्रकार की बात सुनकर प्रसन्नात्मा विमल बुद्धिवाले रघुश्रेष्ठ श्रीराम ने
श्रीमहादेव जी बोले – तब भगवान ब्रह्मा जी ने महात्मा श्रीराम से संक्षेप में पूर्व वृतांत को कहना प्रारंभ किया
श्रीमहादेव जी बोले – इस प्रकार युद्ध में पराजित राक्षसों के स्वामी रावण ने युद्ध करने के लिए महाबलि कुंभकर्ण
श्रीमहादेव जी बोले – विभीषण को पूर्णरूप से शरणागत जानकर महाबाहु श्रीराम ने उसके साथ मैत्री स्थापित की और उसे