महाभागवत – देवीपुराण – उनतालीसवाँ अध्याय
श्रीमहादेवजी बोले – मारीच को मारकर जब श्रीराम लक्ष्मण के साथ जब अपनी पर्णकुटी पर आए, तब उन्होंने वहां जानकी
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श्रीमहादेवजी बोले – मारीच को मारकर जब श्रीराम लक्ष्मण के साथ जब अपनी पर्णकुटी पर आए, तब उन्होंने वहां जानकी
श्रीमहादेवजी बोले – नारदजी ! मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ जी ने महाबाहु राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न को देवी के मंत्र की
श्रीमहादेव जी बोले – भगवती के ऐसे वचन सुनकर नेत्रों में आह्लाद भरे हुए भगवान विष्णु ने उन्हें भक्तिपूर्वक पुनः
नारदजी बोले – महादेव ! विश्वनाथ ! आपने जिस वार्षिकी शारदीय महापूजा की बात बताई थी, जिसे रघुवर भगवान श्रीराम
ऊँ श्री शनैश्चराय नमः। ऊँ शान्ताय नमः। ऊँ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः। ऊँ शरण्याय नमः। ऊँ वरेण्याय नमः। ऊँ सर्वेशाय नमः। ऊँ
इस अध्याय में देवताओं द्वारा कार्तिकेय की वन्दना, ब्रह्माजी के साथ कार्तिकेय का अपने माता-पिता के पास कैलास आना, भगवान