महाभागवत – देवी पुराण – इक्कीसवाँ अध्याय
इस अध्याय में शंकर जी का सती को पुन: पत्नी रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पर तपस्या में
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इस अध्याय में शंकर जी का सती को पुन: पत्नी रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पर तपस्या में
इस अध्याय में भगवती का विविध बालोचित लीलाओं द्वारा हिमालय तथा मेना को आनन्दित करना, देवर्षि नारद द्वारा देवी के
इस अध्याय में हिमालय को तत्त्व ज्ञान का उपदेश प्रदान कर देवी का सामान्य बालिका की भाँति क्रीडा करना है,
इस अध्याय में भगवती गीता के वर्णन में मोक्ष योग का उपदेश है, देवी के स्थूल स्वरुपों में दस महाविद्याओं
इस अध्याय में भगवती गीता के वर्णन में ब्रह्मयोग का उपदेश, पाँचभौतिक देह, गर्भस्थ जीव का स्वरुप तथा गर्भ में
इस अध्याय में भगवती गीता के वर्णन में ब्रह्मविद्या का उपदेश है, आत्मा का स्वरूप, अनात्मपदार्थों में आत्मबुद्धि का परित्याग,