भरणी नक्षत्र उपचार
यदि किसी जातक का भरणी जन्म नक्षत्र है और उसे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तब ऎसे में
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यदि किसी जातक का भरणी जन्म नक्षत्र है और उसे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तब ऎसे में
अगस्त्य उवाच अश्वानन महाबुद्धे सर्वशास्त्रविशारद । कथितं ललितादेव्या: चरितं परमाद्भुतम् ।।1।। पूर्वं प्रादुर्भवो मातु: तत: पट्टाभिषेचनम् । भण्डासुरवधश्चैव विस्तरेण त्वयोदित:
अस्य श्रीललितात्रिशतीस्तोत्रमालामन्त्रस्य हयग्रीवऋषये नम: । (शिरसि) अनुष्टुपछन्द से नम: । (मुखे), श्रीललिताम्बादेवतायै नम: । हृदये, क. 5 बीजाय नम: ।
यदि कोई व्यक्ति मानसिक अथवा शारीरिक रूप से परेशान है. किसी प्रकार की बीमारी से दुखी है तब इस स्तोत्र
श्री बालात्रिपुरसुन्दर्यै नम: श्रीललिताष्टोत्तरशतनामावलि: ऊँ ऎं हृीं श्रीं 1) ऊँ ऎं हृीं श्रीं रजताचलश्रृड्गाग्रमध्यस्थायै नमो नम: । 2) ऊँ
इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें वेदरूपी कल्पवृक्ष के परिपक्व फल “निगमकल्पतरोर्गलितं फलं” अर्थात श्रीमद्भागवतमहापुराण के प्रथम स्कन्ध