श्री नवग्रह चालीसा
जन्म कुंडली में अगर सभी ग्रहो से परेशानी है तब अकसर नवग्रह शांति पाठ की सलाह दी जाती है लेकिन
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जन्म कुंडली में अगर सभी ग्रहो से परेशानी है तब अकसर नवग्रह शांति पाठ की सलाह दी जाती है लेकिन
मनोनिवृत्ति: परमोपशान्ति: सा तीर्थवर्या मणिकर्णिका च। ज्ञानप्रवाहा विमलादिगंगा सा काशिकाSहं निजबोधरूपा।।1।। यस्यामिदं कल्पितमिन्द्रजालं चराचरं भाति मनोविलासम्। सच्चित्सुखैका परमात्मरूपा सा
ध्यानम् गलदरक्तमुण्डावलीकण्ठमाला महाघोररावा सुदंष्ट्रा कराला। विवस्त्रा श्मशानालया मुक्तकेशी महाकालकामाकुला कालिकेयम्।।1।। अर्थ – ये भगवती कालिका गले में रक्त टपकते हुए
चिदाकारो धाता परमसुखद: पावनतनु- र्मुनीन्द्रैर्योगीन्द्रैर्यतिपतिसुरेन्द्रैर्हनुमता । सदा सेव्य: पूर्णो जनकतनयांग: सुरगुरू रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम्।।1।। मुकुन्दो
नमस्ते शरण्ये शिवे सानुकम्पे नमस्ते जगद्व्यापिकेविश्वरूपे। नमस्ते जगद्वन्द्यपादारविन्दे नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे।।1।। नमस्ते जगच्चिन्त्यमानस्वरूपे नमस्ते महायोगिनि ज्ञानरूपे। नमस्ते नमस्ते सदानन्दूपे
प्रात: स्मरामि हृदि संस्फुरदात्मतत्त्वं सच्चित्सुखं परमहंसगतिं तुरीयम् । यत्स्वप्नजागरसुषुप्तिमवैति नित्यं तद्ब्रह्म निष्कलमहं न च भूतसंघ:।।1।। अर्थ – मैं प्रात:काल, हृदय