श्रीपुरुषोत्तम सहस्त्रनामावलि:
1) ऊँ नमो भगवते श्रीकृष्णाय नम: । 2) ऊँ नमो भगवते सच्चिदानन्दाय नम: । 3) ऊँ नमो भगवते नित्यलीलाविनोदकृते नम:
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1) ऊँ नमो भगवते श्रीकृष्णाय नम: । 2) ऊँ नमो भगवते सच्चिदानन्दाय नम: । 3) ऊँ नमो भगवते नित्यलीलाविनोदकृते नम:
श्रीगणेशाय नम: । श्रीदत्तात्रेय नम: ।। ऋषिय ऊचु: कथं संकल्पसिद्धि: स्याद्वेदव्यास कलौ युगे । धर्मार्थकाममोक्षाणां साधनं किमुदाहृतम् ।।1।। अर्थ ऋषियों
पार्वती-मंगल में श्रीतुलसीदास जी ने देवाधिदेव भगवान् शंकर के द्वारा जगदम्बा पार्वती के कल्याणमय पाणिग्रहण का काव्यरूप में रसमय चित्रण
एक समय की बात है, ब्रह्मा आदि देवताओ ने पुष्प आदि विविध उपचारों से महेश्वरी दुर्गा का पूजन किया. इस
ऊँ श्रीरामो रामचन्द्रश्च रामभद्रश्च शाश्वत:। राजीवलोचन: श्रीमान् राजेन्द्रो रघुपुंगव: ।। जानकीवल्लभो जैत्रो जितामित्रो जनार्दन:। विश्वामित्रप्रियो दान्त: शरण्यत्राणतत्पर:।। वालिप्रमथनो वाग्मी सत्यवाक्
“चाक्षुषोपनिषद्” अथवा “चाक्षुषी” विद्या समस्त प्रकार के नेत्र रोगों के नाश के लिए पढ़ी जाती है. ॐ तस्याश्चाक्षुषीविद्याया अहिर्बन्ध्यु