मूल नक्षत्र का उपचार
मूल नक्षत्र का देवता भय व मृत्यु की देवी “नृति” को माना गया है. कुछ विद्वान नृति देवी को प्रलंयकारी
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मूल नक्षत्र का देवता भय व मृत्यु की देवी “नृति” को माना गया है. कुछ विद्वान नृति देवी को प्रलंयकारी
ज्येष्ठा नक्षत्र की गणना गण्डमूल नक्षत्रों के अन्तर्गत भी होती है. इस नक्षत्र के स्वामी बुध हैं और इन्द्र इस
श्री सूर्य चालीसा ।।दोहा।। कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अंग । पद्मासन स्थित ध्याइये, शंख चक्र के संग ।।
अनुराधा नक्षत्र अगर जन्म नक्षत्र होकर पाप प्रभाव में है तब इसके पाप प्रभाव को मिटाने के लिए द्वादश आदित्य
श्री पितर चालीसा ।।दोहा।। हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद, चरणाशीश नवा दियो रख दो सिर पर हाथ । सबसे
अगर विशाखा नक्षत्र आपका जन्म नक्षत्र होकर पीड़ित अथवा अशुभ प्रभाव में हैं तब बहुत सी परेशानियों और बाधाओं का