श्री भैरव चालीसा और आरती
।।दोहा।। श्री गणपति, गुरु गौरि पद, प्रेम सहित धरि माथ । चालीसा वन्दन करौं, श्री शिव भैरवनाथ ।। श्री भैरव
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।।दोहा।। श्री गणपति, गुरु गौरि पद, प्रेम सहित धरि माथ । चालीसा वन्दन करौं, श्री शिव भैरवनाथ ।। श्री भैरव
श्री तुलसी चालीसा ।।दोहा।। श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय । जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय ।।
स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव अर्थात वायु को माना गया है और इस नक्षत्र के स्वामी ग्रह राहु हैं.
।।दोहा।। श्री गुरु चरण चितलाय के धरें ध्यान हनुमान । बालाजी चालीसा लिखे “ओम” स्नेही कल्याण ।। विश्व विदित वर
चित्रा नक्षत्र के देवता “विश्वकर्मा” जी हैं. यदि जन्म कुंडली में चित्रा नक्षत्र पीड़ित है अथवा इस नक्षत्र में पाप
सूर्य की पहली किरण को सविता कहा गया है और इसी “सविता” को हस्त नक्षत्र का देवता माना गया है.