अनुराधा नक्षत्र का उपचार

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अनुराधा नक्षत्र अगर जन्म नक्षत्र होकर पाप प्रभाव में है तब इसके पाप प्रभाव को मिटाने के लिए द्वादश आदित्य की उपासना करना बताया गया है. सूर्य के 108 नाम अथवा सूर्य के बारह नामों के साथ सूर्य नमस्कार से भी इस नक्षत्र के शुभ फल बढ़ाए जा सकते हैं. आदित्य हृदय स्तोत्र के नियमित जाप से भी इस नक्षत्र के पापत्व को खतम किया जा सकता है.

लाल, सुनहरी तथा नीले रंग का उपयोग भी इस नक्षत्र की शुभता बढ़ाता है. कुछ विद्वानों के मत से शिव तथा विष्णु भगवान की पूजा-आराधना से भी इस नक्षत्र के शुभ फलों में वृद्धि होती है. हरि-हर के नियमित पूजन से तथा स्तवन से भी इस नक्षत्र का पाप प्रभाव दूर होता है तथा शुभ परिणाम सामने आते हैं. अनुराधा नक्षत्र के जातक को अपना कोई भी महत्वपूर्ण कार्य करना हो तो चंद्रमा के अनुराधा नक्षत्र में गोचर के समय आरंभ करना चाहिए. अनुराधा नक्षत्र की तिथि के दिन अथवा अनुराधा नक्षत्र का जब चांद्र मास चल रहा हो तब भी आवश्यक तथा महत्वपूर्ण कार्य किए जाने चाहिए ताकि शुभ फलों की प्राप्ति अधिक से अधिक हो सके.

द्वादश आदित्यों में से “मित्र” नामक आदित्य इस नक्षत्र का देवता माना गया है इसलिए इस आदित्य की प्रतिदिन पूजा, उपासना करने से भी इस नक्षत्र के शुभ फल बढ़ाए जा सकते हैं. इसके अतिरिक्त जौ व घी मिश्रित सामग्री से होम करना चाहिए और होम करते समय अनुराधा नक्षत्र के वैदिक मंत्र की एक माला का जाप करना चाहिए. यदि होम संभव ना हो तब इस नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप ही प्रतिदिन करने से भी शुभ फल प्राप्त किए जा सकते हैं, मंत्र है :-

ऊँ नमो मित्रस्य वरुणस्य चक्षसे महोदेवाय तदृतगूँ समर्यत दूरदृशे

देव जाताय केतवे दिवस पुत्राय सूर्योयश गूँ सत ऊँ मित्राय नम: ।।

 

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https://chanderprabha.com/2019/06/17/remedies-for-jyeshtha-nakshatra/

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