महाभागवत – देवी पुराण – पचपनवाँ अध्याय
श्रीमहादेव जी बोले – इस प्रकार श्यामसुंदर श्रीकृष्ण रूप से देवी भगवती ने पृथ्वी के भार स्वरूप दुष्ट चित्त वाले
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श्रीमहादेव जी बोले – इस प्रकार श्यामसुंदर श्रीकृष्ण रूप से देवी भगवती ने पृथ्वी के भार स्वरूप दुष्ट चित्त वाले
श्रीमहादेव जी बोले – एक समय की बात है – नारदमुनि वीणा बजाते हुए और भगवान विष्णु की अमृतमयी कथा
श्रीनारद जी बोले – देवकी के गर्भ से बालकरूप में प्रादुर्भूत होकर साक्षात भगवती गोकुल में नंदगोप के घर में
श्रीमहादेव जी बोले – मुनिश्रेष्ठ ! प्रातःकाल पुत्रोंत्पत्ति की जानकारी होने पर नन्द जी ने उसका जन्मोत्सव मनाया और ब्राह्मणों
श्री महादेव जी बोले – ब्रह्माजी के प्रार्थना करने पर साक्षात भगवती देवताओं का कार्य सिद्ध करने के लिए अपने
श्रीनारदजी बोले – अनेक तत्वज्ञानी लोग कहते हैं कि जो परात्पर विद्यास्वरूपिणी काली हैं, उन्होंने ही स्वयं पृथ्वी पर श्रीकृष्ण