महाभागवत – देवी पुराण – अड़तालीसवाँ अध्याय
श्रीमहादेवजी बोले – तदनंतर श्रीरामचंद्र जी दंडवत प्रणाम करके परम भक्ति से युक्त होकर प्रसन्नमन से भगवती की स्तुति करने
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श्रीमहादेवजी बोले – तदनंतर श्रीरामचंद्र जी दंडवत प्रणाम करके परम भक्ति से युक्त होकर प्रसन्नमन से भगवती की स्तुति करने
श्रीमहादेव जी बोले – इन्द्र आदि सभी देवताओं ने स्वर्ग में तथा परमेश्वर श्रीराम ने मृत्युलोक में सभी लोकों की
श्रीदेवी जी बोली – इस प्रकार इस असमय के उपस्थित होने पर मेरी संतुष्टि के लिए तीनों लोकों के निवासियों
श्रीमहादेव जी बोले – सुरश्रेष्ठ ब्रह्माजी बिल्ववृक्ष की छाया में भगवती जगदंबिका का असमय में भी भक्तिपूर्वक पूजन करके और
श्रीराम जी बोले – त्रिलोकवंदनिया ! युद्ध में विजय देनेवाली ! कात्यायनी ! आपको बार-बार नमस्कार है। मुझ पर प्रसन्न
श्रीमहादेवजी बोले – महामुने ! ब्रह्माजी के मुख से इस प्रकार की बात सुनकर प्रसन्नात्मा विमल बुद्धिवाले रघुश्रेष्ठ श्रीराम ने