राहुपञ्चविंशतिनामस्तोत्रम

राहुर्दानवमन्त्री च सिंहिकाचित्तनन्दनः । अर्धकायः सदा क्रोधी चन्द्रादित्यविमर्दनः ।।1।। रौद्रो रुद्रप्रियो दैत्यः स्वर्भानुर्भानुभीतिद:। ग्रहराजः सुधापायी राकातिथ्यभिलाषुक: ।।2। कालदृष्टिः कालरूपः श्रीकण्ठहृदयाश्रय:

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श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली – लक्ष्मी जी के 108 नाम

वन्दे पद्ममकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां, हस्ताभ्या-अभयप्रदां मणिगणैर्नानाविधैर्भूषिताम । भक्ताभीष्टफलप्रदां हरिहर-ब्रह्मादिभि: सेवितां, पाश्र्वे पंकज-शंख-पद्म-निधिभिर्युक्तां सदा शक्तिभि:।। सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतरांशुक-गन्ध-माल्य-शोभे । भगवति हरिवल्लभे

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आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की

आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की, मथुरा-कारागृह-अवतारी, गोकुल जसुदा-गोद-विहारी, नंदलाल नटवर गिरिधारी, वासुदेव हलधर-भैया की ।। आरती ।। मोर-मुकुट पीताम्बर छाजै, कटि

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