मघा नक्षत्र का उपचार

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मघा नक्षत्र के देवता पितरों अथवा पूर्वजों को माना गया है इसलिए इस नक्षत्र के पीड़ित होने पर अपने से बड़ों व गुरुजनों का आदर करना चाहिए. पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनकी नियत तिथि पर उनका श्राद्ध श्रद्धापूर्वक करना चाहिए. घर में जब भी कोई पूजा तथा विशेष आयोजन, जन्म अथवा विवाह होता है तब भी पितरों को सम्मानपूर्वक याद करना चाहिए. किसी भी जातक का मघा जन्म नक्षत्र है और वह पीड़ित है तब सबसे उत्तम उपाय यही है कि व्यक्ति पितरों का आदर सम्मान उचित समय पर करता रहे.

यदि व्यक्ति समय-समय पर पितरों को आदर देकर याद करके सम्मान देता है तब बदले में पितर अथवा पूर्वज आशीर्वाद बरसाते हैं और कितनी भी कठिन अथवा विषम परिस्थितियाँ क्यों ना हो, उनसे व्यक्ति बाहर निकल आता है. जीवन में तरक्की, उन्नति, यश तथा सम्मान पाता है. कई विद्वान इस नक्षत्र के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शिव की आराधना तथा माँ काली की उपासना भी बताते हैं.

इस नक्षत्र के पाप प्रभाव से बचने के लिए गहरे रँग के रेशमी वस्त्रों का उपयोग किया जा सकता है अथवा सुनहरे पीले रंग का भी उपयोग किया जा सकता है. जिस दिन मघा नक्षत्र पड़ता है उस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना के साथ “ऊँ नम: शिवाय:” मंत्र का जाप करने से इस नक्षत्र को बल मिलता है. माघ के पूरे महीने में भगवान शिव की आराधना तथा “ऊँ नम: शिवाय” का जाप करना चाहिए इससे भी मघा नक्षत्र का पापत्व कम होता है.

इस नक्षत्र के अधिक शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए व्यक्ति ऎसे ब्राह्मण को आमंत्रित करे जो उसके पिता समान हो या गुरु समान हो और सामर्थ्यानुसार पूजन करे व दान दें. पूजन ऎसे करें जैसे हम देवता की करते हैं. मघा नक्षत्र के दुष्परिणामों से बचने के लिए “भृंगराज की जड़” को सुखाकर उसे ताबीज के रुप में अपने दिल के पास धारण करना चाहिए अथवा बाजू में धारण करना चाहिए.

मघा नक्षत्र को बल प्रदान करने के लिए व्यक्ति कपड़े, तिल और चावल का दान सुपात्र ब्राह्मण को करे. अपने पितरों के नाम से कभी-कभार दूध और अनाज का दान भी समय-समय पर करते रहना चाहिए. ऎसा करने से भी आपके पितर आपसे प्रसन्न होकर आपको आशीर्वाद प्रदान करेगें और आप जीवन में उत्तरोत्तर उन्नति करेगें. इस नक्षत्र के शुभ प्रभाव में वृद्धि के लिए व्यक्ति चावल, घी, तिल को मिलाकर होम कर सकता है और होम करते हुए मघा नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप 108 बार कर सकता है. यदि होम करना संभव ना हो तब प्रतिदिन 108 बार मघा नक्षत्र के वैदिक मंत्र का ही जाप कर करके इस नक्षत्र को बल प्रदान कर सकता है, मंत्र है :-

ऊँ पितृभ्य: स्वधायिभ्य: स्वधानम: पितामहेभ्य: स्वधायिभ्य: स्वधानम: ।

प्रपिता महेभ्य: स्वधायिभ्य: स्वधाानम: अक्षन्न पितरो मीमदन्त

पितरोsतीतृपन्त पितर: पितर: शुन्दध्वम् ऊँ पितृभ्योनम: ।।

 

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https://chanderprabha.com/2019/06/11/remedies-for-purvaphalguni-nakshatra/