शुक्रचतुर्विंशतिनामस्तोत्रम

शृण्वन्तु मुनयः सर्वे शुक्रस्तोत्रमिदं शुभम् | रहस्यं सर्वभूतानां शुक्रप्रीतिकरं शुभम् |1|| येषां सङ्कीर्तनान्नित्यं सर्वान् कामानवाप्नुयात्। तानि शुक्रस्य नामानि कथयामि शुभानि

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शिवाष्टकम

तस्मै नम: परमकारणकारणाय, दीप्तोज्ज्वलज्ज्वलितपिड़्गल लोचनाय । नागेन्द्रहारकृतकुण्डलभूषणाय, ब्रह्मेन्द्रविष्णुवरदाय नम: शिवाय ।।1।।   श्रीमत्प्रसन्नशशिपन्नगभूषणाय, शैलेन्द्रजावदनचुम्बितलोचनाय । कैलासमन्दरमहेन्द्रनिकेतनाय, लोकत्रयार्तिहरणाय नम: शिवाय ।।2।।

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अङ्गारकस्तोत्रम्

अंगारकः शक्तिधरो लोहिताङ्गो धरासुतः| कुमारो मङ्गलो भौमो महाकायो धनप्रदः||1|| ऋणहर्ता दृष्टिकर्ता रोगकृद्रोगनाशनः| विद्युत्प्रभो व्रणकरः कामदो धनहृत् कुजः||2|| सामगानप्रियो रक्तवस्त्रो रक्तायतेक्षणः|

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श्रीरुद्राष्टकम

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपं । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाशमाकाशवासं भजेsहं ।।1।। अनुवाद: हे मोक्षस्वरूप, विभु, ब्रह्म और वेदस्वरूप,

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भगवान मर्यादापुरुषोत्तम की आरती

आरती कीजै श्रीरघुबर की । सत चित आनँद शिव सुंदरकी ।।टेक।। दशरथ-तनय कौसिला-नन्दन, सुर-मुनि-रक्षक दैत्य-निकन्दन, अनुगत-भक्त भक्त-उर-चन्दन, मर्यादा पुरुषोत्तम वरकी

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