गणपतिस्तोत्रम
निर्विघ्नार्थं हरीशाद्या देवा अपि भजन्ति यम । मर्त्यै: स वक्रतुण्डोsर्च्य इति गाणेशसम्मतम ।।1।। जगत्सृष्ट्यादिहेतु: सा वरा श्रुत्युक्तदेवता । गणानां
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निर्विघ्नार्थं हरीशाद्या देवा अपि भजन्ति यम । मर्त्यै: स वक्रतुण्डोsर्च्य इति गाणेशसम्मतम ।।1।। जगत्सृष्ट्यादिहेतु: सा वरा श्रुत्युक्तदेवता । गणानां
जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है तब सर्वप्रथम उसका नक्षत्र चरण देखा जाता है कि वह क्या है.
ग्रह रंग धातु सूर्य केसरिया तांबा चंद्रमा सफेद चांदी मंगल लाल तांबा बुध हरा स्वर्ण व कांसा गुरु पीला
सभी ग्रहों के अपने-अपने उपग्रह होते हैं जो अप्रकाशित होते हैं. इन सभी नौ ग्रहों में से सबसे अधिक महत्व
तर्जनी अंगुली का पहला पोर(1st Phalanx) हर अंगुली में मुख्य रुप से तीन पर्व होते हैं और आपकी तर्जनी अंगुली भी
इस रेखा के विषय में अनेक मतभेद पाए गए हैं. कई विद्वान इसे बुध रेखा या चन्द्र रेखा के समानांतर