महालक्ष्म्यष्टकम्
इन्द्र उवाच नमस्तेSस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोSस्तु ते।।1।। अर्थ – इन्द्र बोले – श्रीपीठ पर स्थित और देवताओं
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इन्द्र उवाच नमस्तेSस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोSस्तु ते।।1।। अर्थ – इन्द्र बोले – श्रीपीठ पर स्थित और देवताओं
ब्रह्मोवाच – Brahmovach स्वधोच्चारणमात्रेण तीर्थस्नायी भवेन्नर:। मुच्यते सर्वपापेभ्यो वाजपेयफलं लभेत्।।1।। अर्थ – ब्रह्मा जी बोले – ‘स्वधा’ शब्द के उच्चारण
अस्य श्रीशीतलास्तोत्रस्य महादेव ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, शीतला देवता, लक्ष्मी बीजम्, भवानी शक्ति:, सर्व-विस्फोटकनिवृत्तय अर्थ – इस श्रीशीतला स्तोत्र के ऋषि
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा।।1।। आशासु
1) ऊँ श्री अनन्तान्त रूपाय नम: 2) ऊँ श्री अक्रूराय नम: 3) ऊँ श्री अपमृत्यु बिनाशाय नम: 4) ऊँ श्री
घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयंकरि। भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।1।। ऊँ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते। जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।2।। जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि।