कार्तिक माह की श्रेष्ठता अथवा महत्ता

एक बार ब्रह्मा जी ने नारद जी को कार्तिक माह के विषय में बताते हुए कहा कि कार्तिक माह भगवान

Continue reading

कार्तिक माह माहात्म्य – तीसरा अध्याय

श्रीकृष्ण भगवान के चरणों में शीश झुकाओ। श्रद्धा भाव से पूजो हरि, मनवांछित फल पाओ।। सत्यभामा ने कहा – हे

Continue reading

कार्तिक माह माहात्म्य – दूसरा अध्याय

सिमर चरण गुरुदेव के, लिखूं शब्द अनूप। कृपा करें भगवान, सतचितआनन्द स्वरूप।। भगवान श्रीकृष्ण आगे बोले – हे प्रिये! जब

Continue reading

कार्तिक माह माहात्म्य – पहला अध्याय

मैं सिमरूँ माता शारदा, बैठे जिह्वा आये। कार्तिक मास की कथा, लिखे ‘कमल’ हर्षाये।। नैमिषारण्य तीर्थ में श्रीसूतजी ने अठ्ठासी

Continue reading

गोविन्दाष्टकम्

चिदानन्दाकारं श्रुतिसरससारं समरसं निराधाराधारं भवजलधिपारं परगुणम्। रमाग्रीवाहारं व्रजवनविहारं हरनुतं सदा तं गोविन्दं परमसुखकन्दं भजत रे।।1।।   महाम्भोधिस्थानं स्थिरचरनिदानं दिविजपं सुधाधारापानं

Continue reading

error: Content is protected !!