श्री काली चालीसा

चौपाई जय काली जगदम्ब जय, हरनि ओघ अघ पुंज। वास करहु निज दास के, निशदिन हृदय निकुंज।। जयति कपाली कालिका,

Continue reading

महालक्ष्म्यष्टकम्

इन्द्र उवाच नमस्तेSस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोSस्तु ते।।1।। अर्थ – इन्द्र बोले – श्रीपीठ पर स्थित और देवताओं

Continue reading

स्वधा स्तोत्रम्

ब्रह्मोवाच – Brahmovach स्वधोच्चारणमात्रेण तीर्थस्नायी भवेन्नर:। मुच्यते सर्वपापेभ्यो वाजपेयफलं लभेत्।।1।। अर्थ – ब्रह्मा जी बोले – ‘स्वधा’ शब्द के उच्चारण

Continue reading

error: Content is protected !!