श्री मयूरेशस्तोत्रम्
यदि कोई व्यक्ति मानसिक अथवा शारीरिक रूप से परेशान है. किसी प्रकार की बीमारी से दुखी है तब इस स्तोत्र
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यदि कोई व्यक्ति मानसिक अथवा शारीरिक रूप से परेशान है. किसी प्रकार की बीमारी से दुखी है तब इस स्तोत्र
श्री बालात्रिपुरसुन्दर्यै नम: श्रीललिताष्टोत्तरशतनामावलि: ऊँ ऎं हृीं श्रीं 1) ऊँ ऎं हृीं श्रीं रजताचलश्रृड्गाग्रमध्यस्थायै नमो नम: । 2) ऊँ
इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें वेदरूपी कल्पवृक्ष के परिपक्व फल “निगमकल्पतरोर्गलितं फलं” अर्थात श्रीमद्भागवतमहापुराण के प्रथम स्कन्ध
1) ऊँ नमो भगवते श्रीकृष्णाय नम: । 2) ऊँ नमो भगवते सच्चिदानन्दाय नम: । 3) ऊँ नमो भगवते नित्यलीलाविनोदकृते नम:
श्रीगणेशाय नम: । श्रीदत्तात्रेय नम: ।। ऋषिय ऊचु: कथं संकल्पसिद्धि: स्याद्वेदव्यास कलौ युगे । धर्मार्थकाममोक्षाणां साधनं किमुदाहृतम् ।।1।। अर्थ ऋषियों
जटाधरं पाण्डुरंगं शूलहस्तं कृपानिधिम् । सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ।। अर्थ पीले वर्ण की आकृति वाले, जटा धारण किए हुए,