महाभागवत – देवीपुराण – तेरहवाँ अध्याय
इस अध्याय में मेनका के गर्भ के अर्धांश से गंगा के प्राकट्य का आख्यान, देवर्षि नारद द्वारा हिमालय को गंगा
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इस अध्याय में मेनका के गर्भ के अर्धांश से गंगा के प्राकट्य का आख्यान, देवर्षि नारद द्वारा हिमालय को गंगा
इस अध्याय में शंकर जी का योनिपीठ कामरूप (कामाख्या) में जाकर तपस्या करना है, जगदम्बा द्वारा प्रकट होकर शीघ्र ही
इस अध्याय में त्रिदेवों द्वारा जगदम्बिका की स्तुति करना, देवी का भगवान शंकर को पार्वती रूप में पुन: प्राप्त होने
इस अध्याय में सती के यज्ञकुण्ड में प्रवेश का समाचार सुनकर भगवान शंकर का शोक से विह्वल होना, उनके तृतीय
इस अध्याय में सती का पिता के घर पहुँचना, माता प्रसूति द्वारा सती का सत्कार करना तथा यज्ञ-विध्वंस के भयंकर
इस अध्याय में भगवान शंकर द्वारा सती का दक्ष के घर जाने को अनुचित बताना, देवी सती के विराट रूप