मां ज्वाला की आरती
जै ज्वाला रानी मैया जै ज्वाला रानी । प्रगटी पर्वत ऊपर कलयुग कल्याणी ।। सती की जिह्वा में गिर अद्भुत
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जै ज्वाला रानी मैया जै ज्वाला रानी । प्रगटी पर्वत ऊपर कलयुग कल्याणी ।। सती की जिह्वा में गिर अद्भुत
।।दोहा।। शक्ति पीठ माँ ज्वालपा धरूं तुम्हारा ध्यान । हृदय से सिमरन करूं दो भक्ति वरदान ।। सुख वैभव सब
अगस्त्य उवाच अश्वानन महाबुद्धे सर्वशास्त्रविशारद । कथितं ललितादेव्या: चरितं परमाद्भुतम् ।।1।। पूर्वं प्रादुर्भवो मातु: तत: पट्टाभिषेचनम् । भण्डासुरवधश्चैव विस्तरेण त्वयोदित:
हर नक्षत्र के अधीन एक वृक्ष अथवा पेड़ जरुर आता है. कोई भी जातक अपने नक्षत्र के अनुसार वृक्ष लगा
अस्य श्रीललितात्रिशतीस्तोत्रमालामन्त्रस्य हयग्रीवऋषये नम: । (शिरसि) अनुष्टुपछन्द से नम: । (मुखे), श्रीललिताम्बादेवतायै नम: । हृदये, क. 5 बीजाय नम: ।
श्री बालात्रिपुरसुन्दर्यै नम: श्रीललिताष्टोत्तरशतनामावलि: ऊँ ऎं हृीं श्रीं 1) ऊँ ऎं हृीं श्रीं रजताचलश्रृड्गाग्रमध्यस्थायै नमो नम: । 2) ऊँ